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अपने अधिकार जानें — Know Your Rights

RTI, मौलिक अधिकार, कानूनी सहायता — जनता के लिए सरल भाषा में

📄 सूचना का अधिकार (RTI Act, 2005)

RTI अधिनियम 2005 भारत के नागरिकों को सरकारी विभागों से सूचना मांगने का कानूनी अधिकार देता है। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे शक्तिशाली हथियार है। अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल ने अब तक 3000+ RTI दायर की हैं।

RTI कैसे दायर करें?

1. सादे कागज पर हिंदी या अंग्रेजी में आवेदन लिखें
2. संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी (PIO) को संबोधित करें
3. ₹10 का शुल्क (पोस्टल ऑर्डर/नकद/DD) संलग्न करें
4. BPL कार्डधारकों को शुल्क से छूट है
5. डाक या ऑनलाइन (rtionline.gov.in) से भेजें
6. 30 दिन में जवाब अनिवार्य (जीवन-मृत्यु मामले में 48 घंटे)

RTI — क्या-क्या मांग सकते हैं?

✅ सरकारी योजनाओं का खर्च विवरण
✅ ठेकों और निविदाओं की जानकारी
✅ भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेज
✅ सड़क/भवन निर्माण का बिल और मात्रा
✅ पेंशन, वेतन, भत्ते संबंधी जानकारी
✅ शिकायतों पर हुई कार्रवाई का विवरण
✅ किसी भी सरकारी फाइल की प्रमाणित प्रति

🌐 ऑनलाइन RTI: rtionline.gov.in — केंद्र सरकार के विभागों के लिए | राज्य सरकार: संबंधित विभाग की वेबसाइट पर

“RTI एक हथियार सै — जो कागज का होवै, पर सरकार की नींव हिला देवै!” — अधि. रविन्द्र सिंह ढुल

⚖️ मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

भारतीय संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12-35) में प्रत्येक नागरिक को 6 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:

1. समता का अधिकार (Art. 14-18)

कानून के समक्ष समानता, धर्म/जाति/लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध, सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता।

2. स्वतंत्रता का अधिकार (Art. 19-22)

वाक् और अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा, संघ/संगठन बनाने, देश में कहीं भी आने-जाने, कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता।

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Art. 23-24)

मानव तस्करी, बेगार/बंधुआ मज़दूरी का निषेध। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कारखानों में काम लेना अपराध।

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Art. 25-28)

अंतःकरण की स्वतंत्रता, किसी भी धर्म को मानने/आचरण/प्रचार करने का अधिकार।

5. शिक्षा और संस्कृति का अधिकार (Art. 29-30)

अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति बनाए रखने तथा शिक्षण संस्थान स्थापित करने का अधिकार।

6. संवैधानिक उपचार का अधिकार (Art. 32)

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च या उच्च न्यायालय जा सकते हैं। डॉ. अम्बेडकर ने इसे “संविधान की आत्मा” कहा।

🏛️ निःशुल्क कानूनी सहायता

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत निम्नलिखित व्यक्ति निःशुल्क कानूनी सहायता के पात्र हैं:

✅ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य
✅ महिलाएं और बच्चे
✅ मानव तस्करी पीड़ित
✅ विकलांग व्यक्ति
✅ प्राकृतिक आपदा पीड़ित
✅ ₹3 लाख तक वार्षिक आय वाले व्यक्ति (उच्च न्यायालय में ₹5 लाख)
✅ जेल में बंद कैदी

संपर्क: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जींद | nalsa.gov.in | टोल फ्री: 15100

📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन

112
पुलिस / आपातकालीन
181
महिला हेल्पलाइन
1098
बाल हेल्पलाइन
15100
कानूनी सहायता
1930
साइबर क्राइम
1075
COVID / स्वास्थ्य

कानूनी सलाह चाहिए?

अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल — 22+ वर्ष, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय

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