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जुलाना के छोरे दिल्ली क्यों जाते हैं? — बेरोजगारी का सच

अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुलहाईकोर्ट अधिवक्ता | RTI कार्यकर्ता | जींद
04 March 2026 6 मिनट





बेरोजगारी — जुलाना विधानसभा

जुलाना के छोरे दिल्ली क्यों जाते हैं?

HKRN की सच्चाई, पेपर लीक का दर्द, ESM का हक और एक छोरी जो डिग्री लेकर घर बैठी है

📅 मार्च 2026
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⏱️ 9 मिनट में पढ़ें
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📍 जुलाना, जींद, हरियाणा
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🏷️ बेरोजगारी · HKRN · युवा · जुलाना
जुलाना के किसी भी चौपाल पर बैठो — बड़े-बुजुर्ग एक ही बात करते मिलेंगे: “छोरा पढ़-लिख गया, पर काम नहीं मिला। दिल्ली गया, गुड़गांव गया — पर अपनी माटी में नहीं रहा।” यह सिर्फ एक परिवार की बात नहीं — जींद जिले के हजारों घरों की कहानी है। और आज हम इस पर खुलकर बात करेंगे।

जुलाना छोड़ क्यों रहे हैं नौजवान?

मैं एक वकील हूं — अदालतों में लड़ता हूं। पर जब नौजवान मेरे पास केस लेकर नहीं, बल्कि नौकरी मांगने आते हैं — तो समझ आता है कि व्यवस्था किस हद तक टूट चुकी है। RTI कैंप में जाता हूं तो 22-25 साल के लड़के-लड़कियां मिलते हैं — पढ़े-लिखे, मेहनती — पर बेकार।

📖 एक असली कहानी — जुलाना चौपाल से

“मेरे गांव का एक लड़का — राजेश — BA, MA किया, NET भी दिया। HSSC का पेपर लीक हुआ तो परीक्षा रद्द। अगली परीक्षा कब होगी — कोई नहीं जानता। तीन साल से घर पर बैठा है। बाप किसान है — कर्ज में डूबा। बेटा बेरोजगार — निराश। यह एक परिवार की कहानी नहीं — जुलाना के सैकड़ों घरों की है।”

📊 हरियाणा की बेरोजगारी — आंकड़ों का सच

20%+
बेरोजगारी दर — राष्ट्रीय औसत से 2x
5+
पेपर लीक स्कैंडल (2019-2024)
लाखों
HKRN ठेका कर्मचारी — बिना सुरक्षा
0
जुलाना में ITI/पॉलिटेक्निक
“जुलाना का छोरा दिल्ली इसलिए जाता सै क्योंकि यहां काम नहीं। जिब काम होगा — तो वो वापस आवैगा। अर जिब वो वापस आवैगा — तो जुलाना बदलेगा।”

HKRN — ठेकेदारी का नया सरकारी नाम

BJP सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) बनाया — कहा गया कि पारदर्शिता आएगी, नौजवानों को रोजगार मिलेगा, बिचौलिए खत्म होंगे। आज तीन साल बाद हकीकत क्या है?

हजारों नौजवान HKRN के जरिए सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं — शिक्षा विभाग में, स्वास्थ्य विभाग में, PWD में। पर वे स्थायी कर्मचारी नहीं हैं। न PF, न ग्रेच्युटी, न नौकरी की सुरक्षा। जब मन आए — हटा दो।

“HKRN म्हं काम करणा मतलब — सरकारी दफ्तर म्हं बेगार करणा। नौकरी का नाम सै, हक कोन्या।”

मैंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में HKRN कर्मचारियों के लिए मुकदमे लड़े हैं। अपनी आंखों से देखा है — कैसे 5-7 साल से काम कर रहा नौजवान एक झटके में सड़क पर आ जाता है। न नोटिस, न मुआवजा — बस “सेवा समाप्त।”

⚠️ HKRN की असली समस्याएं

  • स्थायी नौकरी नहीं — ठेके पर, मनमाने हटाने का अधिकार सरकार को
  • EPF, ESI, ग्रेच्युटी नहीं — श्रम कानून की खुली धज्जियां
  • वेतन नियमित कर्मचारी से 30-40% कम — एक ही काम, असमान वेतन
  • 5-7 साल की सेवा के बाद भी नियमितीकरण नहीं
  • शिकायत करो तो नौकरी जाती है — कोई कानूनी सुरक्षा नहीं

“HKRN रोजगार नहीं — शोषण का सरकारी तंत्र है। नौजवान की मेहनत का फल उसे मिलना चाहिए — कंट्रैक्ट की आड़ में लूट नहीं।”

— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल, हाईकोर्ट बहस, 2024

🔍 RTI से सामने आया सच — HKRN

मेरी RTI के जवाब में पाया गया कि हरियाणा में HKRN कर्मचारियों की संख्या लाखों में है — पर नियमितीकरण का कोई रोडमैप नहीं। सरकार के पास कोई नीति नहीं कि ये कर्मचारी कब स्थायी होंगे।

पेपर लीक — मेहनत का अपमान

हरियाणा में 2019 से 2024 के बीच 5 से अधिक बड़े पेपर लीक हुए — HSSC, HPSC, हरियाणा पुलिस भर्ती, ग्रुप-D। हर बार एक ही कहानी — परीक्षा रद्द, नई तारीख अनिश्चित, दोषी बाहर।

📖 जुलाना के एक नौजवान की बात

“तीन साल पढ़ा, परीक्षा दी, रिजल्ट आया — फिर खबर आई कि पेपर लीक हुआ। अब फिर से परीक्षा होगी — पता नहीं कब। इस बीच उम्र निकल रही है, पैसे खर्च हो रहे हैं, घर वाले उम्मीद छोड़ रहे हैं।”

यह मानसिक तकलीफ क्या होती है — वो सिर्फ वही समझ सकता है जिसने भुगती हो। पर सरकार को कोई फर्क नहीं। दोषी अफसर बाहर हैं, SIT बनी, जांच चल रही है — पर सजा कोई नहीं।

“पेपर लीक कोई दुर्घटना नहीं — यो सरकारी मिलीभगत का नतीजा सै। भर्ती बोर्ड के अफसर अर नेता मिलकै छोरयां का भविष्य बेच रहे सैं।”

मैंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में PIL दायर करने की तैयारी की है। पारदर्शी परीक्षा प्रणाली — ऑनलाइन, CCTV निगरानी में, तीसरे पक्ष के ऑडिट के साथ — यही एकमात्र हल है। और जब विधानसभा में जाऊंगा — तो यह कानून बनवाना म्हारी पहली प्राथमिकता होगी।

“पढ़े-लिखे छोरे का सबसे बड़ा अपमान होता है जब उसकी मेहनत पैसों में बिक जाए। पेपर लीक करने वाले देश के दुश्मन हैं — इनके लिए कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।”

— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल

ESM — देश के वीरों के साथ धोखा

जींद जिले में सैनिक परिवारों की तादाद काफी है। जुलाना के कई परिवारों ने सेना में सेवा दी है। देश के लिए लड़े, सरहद पर तैनात रहे — और जब रिटायर होकर घर आए तो ESM (पूर्व सैनिक) कोटे में नौकरी के लिए भटकते रहे।

HPSC और HSSC भर्तियों में ESM आरक्षण है — पर स्क्रीनिंग टेस्ट में मनमाने कट-ऑफ, equivalency certificate में अड़चनें, आयु में छूट का सही लाभ नहीं। मैंने इन पूर्व सैनिकों के लिए हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी है।

“जो देश के लिए जान दे आया — उसनै नौकरी के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकणा पड़े — यो कहां का इंसाफ सै? ESM का हक उसनै मिलणा चाहिए — यो राष्ट्रीय फर्ज सै।”

🔍 RTI से उजागर — ESM भर्ती

जींद जिले में ESM कोटे में खाली पदों पर RTI दाखिल की तो पता चला — दर्जनों पद वर्षों से रिक्त हैं पर भरे नहीं गए। कारण? “प्रक्रियागत देरी।” यह देरी अनजाने नहीं है।

जुलाना में ITI नहीं — हुनर सीखने बाहर जाओ

हुनरमंद नौजवान बेरोजगार नहीं रहता — पर हुनर सीखने की सुविधा चाहिए। जुलाना में एक भी सरकारी ITI या पॉलिटेक्निक नहीं है। रोहतक, हिसार जाना पड़े — जो गरीब घर का बच्चा नहीं जा सकता।

सरकार “स्किल इंडिया” का नाम लेती है। पर जुलाना में ground reality यह है कि 12वीं के बाद तकनीकी शिक्षा के लिए घर छोड़ना पड़ता है। किसान के बेटे के लिए यह संभव नहीं — न पैसा, न सुविधा।

“जुलाना म्हं ITI होगी तो छोरा हुनर सीखेगा — हुनर सीखेगा तो काम मिलेगा — काम मिलेगा तो गाम नहीं छोड़ेगा। यो एक साधारण सी बात सै जो सरकार नहीं समझती।”

NH-352 (रोहतक-जींद हाईवे) पूरा हो चुका है। अब जुलाना को SEZ और औद्योगिक cluster की दरकार है — जहां कृषि आधारित उद्योग लगें और स्थानीय नौजवानों को 75% रोजगार मिले। यह मांग म्हारी विधानसभा की पहली प्राथमिकता होगी।

छोरी की बात — आधी आबादी की तकलीफ

बेरोजगारी की चर्चा में अक्सर छोरियों का जिक्र नहीं होता। पर जुलाना की असलियत यह है कि पढ़ी-लिखी बेटियां घर पर बैठी हैं — इसलिए नहीं कि वे कमज़ोर हैं, बल्कि इसलिए कि आगे पढ़ने के लिए hostel सुविधा नहीं, नौकरी के लिए सुरक्षित माहौल नहीं, और HKRN जैसी योजनाओं में महिलाओं का विशेष ध्यान नहीं।

“जुलाना की बेटी दिल्ली की बेटी तै कम नहीं — बस उसनै मौका चाहिए। मौका दो — देखो कैसे उड़ती सै!”

जब विधानसभा में जाऊंगा — महिला स्वरोजगार, SHG बैंक लिंकेज, और बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए hostel — ये तीनों मांगें पहले दिन से उठाऊंगा।

म्हारे संकल्प — नौजवानों के लिए, जुलाना के लिए

यह वादे नहीं — संकल्प हैं। हर बिंदु पर पहले से हाईकोर्ट में या RTI में लड़ाई जारी है।

1

HKRN नियमितीकरण

तय अवधि के बाद स्थायी दर्जा — EPF, ESI, ग्रेच्युटी सहित। हाईकोर्ट में पहले से लड़ाई।

2

पेपर लीक कानून

दोषी को आजीवन सरकारी नौकरी से बाहर। परीक्षा प्रणाली में तीसरे पक्ष का ऑडिट।

3

जुलाना में ITI/पॉलिटेक्निक

सरकारी संस्था — गांव में ही हुनर सीखने का मौका। घर छोड़ने की जरूरत नहीं।

4

ESM भर्ती पारदर्शिता

पूर्व सैनिकों का हक उन्हें मिले — कट-ऑफ और equivalency में मनमानी बंद।

5

SEZ / औद्योगिक cluster

NH-352 कॉरिडोर पर — 75% स्थानीय रोजगार। कृषि आधारित उद्योग पहले।

6

महिला स्वरोजगार

SHG बैंक लिंकेज, बेटियों के लिए hostel, डिजिटल साक्षरता — जुलाना की बेटी आगे बढ़ेगी।

“जुलाना का छोरा दिल्ली इसलिए जाता है क्योंकि यहां काम नहीं — जब काम होगा, तो वो वापस आएगा।”

मैं वो इंसान हूं जिसने सरकारी कुर्सी छोड़ दी जब किसान पर जुल्म हुआ। मैं वो इंसान हूं जो 3000 RTI दाखिल करके सरकारी झूठ बेनकाब करता आया है। जब जुलाना से विधानसभा में जाऊंगा — नौजवान की आवाज़ वहां गूंजेगी।

“जुलाना के छोरे-छोरियों से म्हारी एक ही बात सै — तुम्हारी मेहनत पर भरोसा सै। व्यवस्था बदलणी पड़ेगी — अर वो काम म्हारा सै!”

अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल | +91-9915442266 | ravinder4jind.in

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अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल
हाईकोर्ट अधिवक्ता | RTI कार्यकर्ता | पूर्व AAG | कांग्रेस राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट

3000+ RTI, 50+ PIL, 22+ वर्ष — जींद जिले की जनता की सेवा में समर्पित।