खुला पत्र — Open Letter
जुलाना के किसानों का सवाल:
हमारी विधायक कहां हैं?
72 गांव, हज़ारों किसान, अनगिनत समस्याएं — और एक अनुपस्थित जनप्रतिनिधि
✍️ अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल | मार्च 2026
\”यह जनता की लड़ाई थी और जनता जीती — मैं तो सिर्फ एक चेहरा थी।
जो प्यार और विश्वास इस देश ने मुझे दिया है, मैं उसे बनाए रखूंगी।\”
— विनेश फोगाट, 8 अक्टूबर 2024, चुनाव जीतने के बाद
18 महीने बाद — क्या यह वादा निभाया गया?
यह लेख किसी दल के विरुद्ध नहीं है। यह किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं है। यह जुलाना विधानसभा क्षेत्र (34) के 72 गांवों के उन हज़ारों किसानों की आवाज़ है, जिन्होंने अक्टूबर 2024 में भरोसे के साथ अपना वोट डाला — और 18 महीने बाद भी अपनी विधायक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विनेश फोगाट ने 65,080 वोट पाकर जुलाना से कांग्रेस की पहली जीत 2005 के बाद दर्ज की। लेकिन विधायक बनना एक शुरुआत है, अंत नहीं। चुनाव जीतना “दांव” था — अब “कुश्ती” क्षेत्र के विकास की है। और इस कुश्ती में जुलाना का किसान अकेला लड़ रहा है।
1. 18 महीने का हिसाब — क्या हुआ, क्या नहीं
अक्टूबर 2024
जुलाना से विधायक निर्वाचित। वादा — “महिलाओं के अधिकारों और बेरोज़गारी पर काम करूंगी।” किसानों, सैनिकों और संविधान को मुद्दा बताया।
दिसंबर 2024
जुलाना के पास सुन्दर ब्रांच नहर टूटी — गांव नदगढ़ के 300 एकड़ से अधिक खेतों में पानी भरा। किसानों की फ़सलें तबाह। विधायक की ओर से कोई उल्लेखनीय हस्तक्षेप सामने नहीं आया।
2025 — पूरा वर्ष
जींद ज़िले में भूजल संकट गहराया। शोध के अनुसार जुलाना ब्लॉक में 60% भूजल खराब गुणवत्ता (खारा/क्षारीय) का है। नहरी सिंचाई अपर्याप्त, किसान ट्यूबवेल पर निर्भर। कोई विधानसभा स्तरीय पहल नहीं।
जुलाई 2025
व्यक्तिगत जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव — पुत्र का जन्म। बधाई स्वाभाविक है। लेकिन इसके बाद क्षेत्र से दूरी और बढ़ी।
दिसंबर 2025
कुश्ती में वापसी की घोषणा। LA 2028 ओलंपिक के लिए गोवा के JSW अकेडमी में प्रशिक्षण शुरू। प्रेस में बयान: “The fire never left.” लेकिन जुलाना के किसानों की “आग” — MSP न मिलना, कर्ज़, फ़सल बर्बादी — उसे कौन बुझाएगा?
फरवरी 2026
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता — DDGS, सोयाबीन तेल, ज्वार पर शुल्क समाप्त। सोयाबीन 10%, मक्का 4% गिरा। देशभर में किसान सड़कों पर। 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल। जुलाना की विधायक कहां थीं? गोवा में प्रशिक्षण में, या जुलाना के किसानों के साथ?
2. मूल प्रश्न — विधायक या पहलवान?
विनेश फोगाट एक उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं — तीन बार की ओलंपियन, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स स्वर्ण पदक विजेता। उनके खेल करियर पर हर भारतीय को गर्व है।
लेकिन जब उन्होंने सितंबर 2024 में कुश्ती से संन्यास लेकर राजनीति में प्रवेश किया, तो यह एक सचेत निर्णय था। जुलाना के 72 गांवों के लोगों ने उन्हें विधायक चुना — पहलवान नहीं। उन्होंने वोट विकास, रोज़गार और किसानों के हित के लिए दिया।
15 महीने बाद, दिसंबर 2025 में, उन्होंने कुश्ती में वापसी की घोषणा कर दी। अब वे गोवा के JSW अकेडमी में 53 किलो वर्ग में LA 2028 ओलंपिक की तैयारी कर रही हैं। प्रश्न सीधा है:
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गोवा में प्रशिक्षण
JSW Academy, 53kg वर्ग
LA 2028 ओलंपिक लक्ष्य
कोच: वॉलर अकोस
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जुलाना में हक़ीक़त
72 गांव, हज़ारों किसान
भूजल संकट, नहर टूटना
व्यापार समझौते का ख़तरा
क्या कोई व्यक्ति एक साथ पूर्णकालिक अंतरराष्ट्रीय एथलीट और पूर्णकालिक विधायक दोनों हो सकता है? ओलंपिक की तैयारी दिन में 6-8 घंटे प्रशिक्षण, कठोर आहार, यात्रा और प्रतियोगिताओं की मांग करती है। विधायकी — विशेषकर विपक्ष में — क्षेत्र में उपस्थिति, किसानों से संवाद, विधानसभा में सवाल और सरकार पर दबाव बनाने की मांग करती है। दोनों पूर्णकालिक कार्य हैं। आधे मन से कोई भी नहीं किया जा सकता।
3. जुलाना का किसान क्या झेल रहा है — वो संकट जिन पर विधायक की चुप्पी है
💧 भूजल संकट — ज़हरीला पानी, सूखते कुएं
वैज्ञानिक शोध (ResearchGate, 2009) के अनुसार जुलाना ब्लॉक में 296 भूजल नमूनों में से केवल 40% अच्छी गुणवत्ता के पाए गए। 26% मामूली खारे, 5% खारे, 14% क्षारीय। IndiaSpend (2025) की रिपोर्ट के अनुसार जींद ज़िले में नहरी सिंचाई अपर्याप्त है और किसान ट्यूबवेल पर निर्भर हैं, जिससे भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है।
❓ विधायक ने सिंचाई विभाग के साथ कोई बैठक की? भूजल पुनर्भरण योजना की मांग रखी? विधानसभा में सवाल उठाया?
🌊 नहर टूटना — 300 एकड़ फ़सल बर्बाद
दिसंबर 2024 में जुलाना के पास गांव नंदगढ़ के समीप सुन्दर ब्रांच नहर टूटी — 300 एकड़ से अधिक खेत जलमग्न हुए। यह जुलाना विधानसभा क्षेत्र का मामला था। क्या किसानों को मुआवज़ा मिला? क्या नहर की मरम्मत हुई? क्या विधायक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया?
❓ नहर की मरम्मत और किसानों को मुआवज़े पर विधायक का कोई सार्वजनिक बयान या हस्तक्षेप?
📉 भारत-अमेरिका व्यापार समझौता — जुलाना के ज्वार-मक्का किसानों पर वार
फरवरी 2026 का व्यापार समझौता सीधे जुलाना के किसानों को प्रभावित करता है। अमेरिकी DDGS (GM मक्का का उप-उत्पाद) और लाल ज्वार के शुल्क-मुक्त आयात से हरियाणा के ज्वार और मक्का किसानों के लिए ख़तरा है। सोयाबीन तेल के सस्ते आयात से सरसों की मांग और कीमतें प्रभावित होंगी। समझौते के बाद सोयाबीन 10% और मक्का 4% गिरा।
❓ 12 फरवरी 2026 को देशभर में किसान सड़कों पर थे। संसद के बाहर विपक्ष ने विरोध किया। जुलाना की विधायक ने इस मुद्दे पर क्या किया?
🌡️ फसल विविधीकरण और MSP संकट
जींद ज़िले में फ़सल पैटर्न पारंपरिक दलहन-तिलहन से गेहूं-धान की ओर खतरनाक रूप से बदल गया है। सरकार की “मेरा पानी-मेरी विरासत” योजना के बावजूद किसान धान से हट नहीं पा रहे क्योंकि वैकल्पिक फ़सलों के लिए MSP की गारंटी नहीं है। हरियाणा बजट 2026-27 में कृषि आवंटन ₹8,320 करोड़ किया गया — लेकिन जुलाना के किसानों तक क्या पहुंचा?
❓ विधायक ने विधानसभा में MSP गारंटी, फ़सल विविधीकरण या बजट आवंटन पर कोई सवाल उठाया?
🏥 बुनियादी ढांचा — सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा
जुलाना के 72 गांवों में टूटी सड़कें, अपर्याप्त PHC (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र), सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी — ये रोज़मर्रा की समस्याएं हैं। एक विपक्षी विधायक का काम है सरकार से सवाल पूछना, विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाना, और अपने क्षेत्र की आवाज़ बनना।
❓ 18 महीनों में विधानसभा में कितने प्रश्न पूछे गए? कितने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखे?
4. सेलिब्रिटी नेता का संकट — पूरे भारत की समस्या
यह केवल विनेश फोगाट का मामला नहीं है। भारतीय राजनीति में सेलिब्रिटी उम्मीदवारों का इतिहास मिश्रित रहा है। फ़िल्मी सितारे, क्रिकेटर, पहलवान — सब चुनाव जीतते हैं, लेकिन बहुत कम लोग विधायी कार्य में रुचि लेते हैं।
चुनाव जीतने के लिए लोकप्रियता काफ़ी है। लेकिन विधायक के रूप में सेवा के लिए चाहिए — क्षेत्र में नियमित उपस्थिति, ग्रामीणों की समस्याओं की समझ, प्रशासन पर दबाव बनाने की क्षमता, विधानसभा में सक्रिय भागीदारी, और सबसे बढ़कर — जनता के प्रति प्रतिबद्धता। ये गुण मैदान (अखाड़े) में नहीं, क्षेत्र (हलके) में आकर सीखे जाते हैं।
एक सकारात्मक उदाहरण: जब विनेश ने कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के विरुद्ध यौन उत्पीड़न आरोपों पर दिल्ली में आंदोलन किया, तो उन्होंने दिखाया कि वे लड़ सकती हैं — अखाड़े के बाहर भी। वही लड़ाई अब जुलाना के किसानों के लिए लड़नी है। वही आग, वही जज़्बा — बस दिशा बदलनी है।
5. जुलाना को अपनी विधायक से क्या चाहिए — एक रचनात्मक मांग-पत्र
यह आलोचना नहीं, यह अपेक्षा है। जुलाना के किसान और नागरिक अपनी विधायक से निम्नलिखित की उम्मीद रखते हैं:
1. क्षेत्र में उपस्थिति
72 गांवों में नियमित “जन-दरबार” या “चौपाल” का आयोजन। महीने में कम से कम 15 दिन जुलाना में — गोवा में नहीं। किसानों की समस्याएं सुनना और उन्हें प्रशासन तक पहुंचाना।
2. विधानसभा में सक्रियता
विपक्षी विधायक का सबसे बड़ा हथियार है — सवाल। सिंचाई, भूजल, MSP, नहर मरम्मत, सड़कें, स्वास्थ्य — हर विषय पर विधानसभा में प्रश्न और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव।
3. व्यापार समझौते पर आवाज़
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुलाना के ज्वार, मक्का और सरसों किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। विधायक को इस मुद्दे पर खुलकर बोलना चाहिए — विधानसभा में, मीडिया में, और किसान सभाओं में।
4. भूजल और सिंचाई
जुलाना ब्लॉक में 60% भूजल ख़राब गुणवत्ता का है। सुन्दर ब्रांच नहर की मरम्मत, नई जल आपूर्ति योजनाएं, और जल संरक्षण — ये तत्काल प्राथमिकताएं होनी चाहिए।
5. फ़सल विविधीकरण सहायता
धान से वैकल्पिक फ़सलों (दलहन, तिलहन, बागवानी) पर जाने के लिए किसानों को MSP गारंटी, तकनीकी मार्गदर्शन और बाज़ार संपर्क चाहिए। विधायक को सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
6. स्पष्ट प्राथमिकता
ओलंपिक और विधायकी — दोनों पूर्णकालिक प्रतिबद्धता मांगते हैं। जनता को स्पष्ट बताएं — प्राथमिकता क्या है? यदि कुश्ती, तो जुलाना को एक सक्रिय स्थानीय प्रतिनिधि (कार्यालय) दें जो उनकी अनुपस्थिति में काम करे।
6. चौधरी देवी लाल याद दिलाते हैं…
चौधरी देवी लाल जी, जिन्होंने जुलाना सहित समूचे हरियाणा के किसानों के लिए लड़ाई लड़ी, उनके शब्द आज भी प्रासंगिक हैं। 1978 में सर छोटू राम को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा था:
\”सर चौधरी छोटू राम पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने मंत्रीमंडल में दायित्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए किसानों के हितों को कभी भी आँखों से ओझल नहीं होने दिया।\”
— चौ. देवी लाल, 12 फरवरी 1978
सर छोटू राम मंत्री थे, फिर भी किसानों को नहीं भूले। विनेश फोगाट विधायक हैं — क्या वे किसानों को याद रखेंगी?
निष्कर्ष — वक़्त है बदलने का
विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक में साबित किया कि वे हार नहीं मानतीं। उन्होंने बृज भूषण के विरुद्ध आंदोलन में साबित किया कि वे लड़ सकती हैं। अब वक़्त है यही लड़ाई जुलाना के किसानों के लिए लड़ने का।
ओलंपिक पदक व्यक्तिगत गौरव है — लेकिन 72 गांवों की सेवा जनसेवा है। अखाड़ा 2028 में भी होगा — लेकिन जुलाना के किसान का संकट आज है, अभी है।
हम यह नहीं कहते कि कुश्ती छोड़ दें। हम यह कहते हैं कि जुलाना पहले है। जिस जनता ने 65,080 वोट दिए, उनका भरोसा पहले है। मैदान बाद में, हल्का पहले।
\”पहलवान के लिए अखाड़ा ज़रूरी है —
लेकिन नेता के लिए जनता ज़रूरी है।\”
नोट: यह लेख रचनात्मक आलोचना और जन-जवाबदेही (public accountability) की भावना से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि जुलाना के नागरिकों की आवाज़ उठाना है। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं — यह सवाल उसी जवाबदेही का हिस्सा है।
स्रोत: Election Commission of India (2024 Results), Wikipedia (Vinesh Phogat, Julana Constituency), ESPN, Outlook India, The Tribune, Olympics.com (wrestling comeback Dec 2025), Zee News (Sundar Branch canal break Dec 2024), ResearchGate (Julana groundwater study), IndiaSpend (Haryana groundwater crisis 2025), Haryana Budget 2026-27 (AgriMoon), White House Joint Statement (6 Feb 2026).