विश्लेषण — Analysis
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता:
किसानों के हितों पर सीधा हमला?
Indo-US Trade Deal — A Direct Attack on Indian Farmers’ Interests?
✍️ अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल | मार्च 2026 | सार्वजनिक दस्तावेज़ों पर आधारित विश्लेषण
⚠️ मुख्य निष्कर्ष — Key Takeaway
6 फरवरी 2026 को व्हाइट हाउस द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य (Joint Statement) के अनुसार, भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों — DDGS, सोयाबीन तेल, लाल ज्वार, मेवे, फल — पर शुल्क समाप्त या कम करने की सहमति दी है। इसके बदले भारत को क्या मिला? अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर शुल्क 50% से घटाकर 18% किया — जबकि ट्रम्प से पहले यह शुल्क मात्र 3.3% था। यानी भारतीय किसानों के बाज़ार को खोलने के बदले भारत को अपने ही पुराने हक से भी कम मिला।
1. पृष्ठभूमि — क्या हुआ?
2 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि भारत के साथ एक व्यापार समझौता हुआ है। इसके बाद 6 फरवरी 2026 को व्हाइट हाउस ने एक संयुक्त वक्तव्य (Joint Statement) और फैक्ट शीट जारी की, जिसमें इस “ऐतिहासिक” समझौते की शर्तें बताई गईं।
इस समझौते की पृष्ठभूमि समझना ज़रूरी है। अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने “Reciprocal Tariffs” (पारस्परिक शुल्क) लगाए, और जुलाई 2025 तक भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। फिर जब भारत ने रूसी तेल आयात रोकने की सहमति दी, तो ट्रम्प ने 25% अतिरिक्त शुल्क हटाया और reciprocal tariff 18% कर दिया।
📄 स्रोत: White House Fact Sheet (6 Feb 2026) — “India has maintained some of the highest tariffs on the United States of any major world economy, with tariffs as high as an average of 37% for agricultural goods.”
📄 स्रोत: US-India Joint Statement (6 Feb 2026) — “India will eliminate or reduce tariffs on all U.S. industrial goods and a wide range of U.S. food and agricultural products.”
2. भारत ने कृषि क्षेत्र में क्या-क्या दिया?
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, भारत ने निम्नलिखित अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करने की सहमति दी:
| उत्पाद | अंग्रेज़ी | भारतीय किसानों पर प्रभाव |
|---|---|---|
| DDGS (सूखा अनाज) | Dried Distillers’ Grains with Solubles | मक्का, ज्वार, सोयाबीन किसानों पर सीधा असर — चारा बाज़ार में अमेरिकी GM उत्पाद की बाढ़ |
| सोयाबीन तेल | Soybean Oil | महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना के लाखों सोयाबीन किसानों की आमदनी पर चोट |
| लाल ज्वार (पशु चारा) | Red Sorghum for Animal Feed | हरियाणा, राजस्थान के ज्वार किसानों के लिए ख़तरा |
| मेवे (बादाम, अखरोट) | Tree Nuts | कश्मीर और हिमाचल के बादाम-अखरोट किसानों को नुकसान |
| ताज़े और प्रसंस्कृत फल | Fresh & Processed Fruit | सेब किसानों (हिमाचल, कश्मीर) पर अमेरिकी सेब की प्रतिस्पर्धा |
| शराब और स्पिरिट | Wine & Spirits | महाराष्ट्र, कर्नाटक के अंगूर किसान प्रभावित |
| “अतिरिक्त उत्पाद” | “Additional Products” | ⚠️ कौन से उत्पाद? कोई स्पष्टता नहीं — यह सबसे ख़तरनाक बात है |
इसके अलावा, संयुक्त वक्तव्य में एक और महत्वपूर्ण वाक्य है: “India also agrees to address long-standing non-tariff barriers to the trade in U.S. food and agricultural products.” — यानी भारत केवल शुल्क ही नहीं, बल्कि गैर-शुल्क बाधाएं (non-tariff barriers) भी हटाएगा। इसमें GM फ़सलों पर प्रतिबंध, खाद्य सुरक्षा मानक और लाइसेंसिंग प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
3. DDGS — ट्रोजन हॉर्स (छुपा ख़तरा)
DDGS (Dried Distillers’ Grains with Solubles) इस समझौते का सबसे विवादास्पद हिस्सा है। यह अमेरिका में GM मक्का से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया का उप-उत्पाद है। अमेरिकी इथेनॉल संयंत्रों की क्षमता 15 अरब गैलन इथेनॉल और 4.4 करोड़ मीट्रिक टन DDGS उत्पादन की है।
समस्या क्या है?
🧬 GM बैकडोर
DDGS GM मक्का से बनता है। भारत में GM फ़सलों पर प्रतिबंध है, लेकिन DDGS के ज़रिए GM उत्पाद अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय बाज़ार में प्रवेश करेंगे। किसान संगठनों ने इसे “बैकडोर एंट्री” कहा है।
📉 कीमतों में गिरावट
समझौते की घोषणा के बाद ही सोयाबीन की कीमत 10% और मक्का की कीमत 4% गिर गई। जबकि भारतीय सोयाबीन किसानों को पहले से ही MSP से 26% कम मूल्य मिल रहा था।
📄 स्रोत: Business Standard (7 Feb 2026) — अक्टूबर 2025 में सोयाबीन का अखिल भारतीय भारित औसत बाज़ार मूल्य ₹3,942 था, जो MSP ₹5,328 से 26% कम था। मक्का का बाज़ार मूल्य ₹1,821 था, जो MSP ₹2,400 से 24% कम था।
📄 स्रोत: Reuters (11 Feb 2026) — समझौते की घोषणा के बाद सोयाबीन और मक्का की कीमतों में क्रमशः 10% और 4% की गिरावट आई।
4. बदले में भारत को क्या मिला?
यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। आइए तुलना करें:
| मानदंड | ट्रम्प से पहले (2024) | ट्रम्प शुल्क (2025) | समझौते के बाद (2026) |
|---|---|---|---|
| भारतीय निर्यात पर अमेरिकी शुल्क | ~3.3% | 50% | 18% |
| भारत ने क्या दिया | कुछ नहीं | कुछ नहीं | कृषि बाज़ार खोला + रूसी तेल बंद + $500B ख़रीदारी |
स्पष्ट है — ट्रम्प ने पहले ज़बरदस्ती शुल्क बढ़ाया (3.3% → 50%), फिर “रियायत” के रूप में 18% किया। यानी भारत को अपने किसानों का बाज़ार खोलकर भी 2024 की तुलना में 5 गुना अधिक शुल्क सहना पड़ रहा है। इसे “ऐतिहासिक जीत” बताना सरासर भ्रामक है।
Cato Institute (अमेरिकी थिंक टैंक) ने भारत-EU FTA और भारत-US समझौते की तुलना में स्पष्ट कहा कि EU ने कहीं बेहतर, व्यापक और संस्थागत समझौता किया, जबकि अमेरिका को “आंशिक रियायतें” मिलीं जिनका वास्तविक प्रभाव अनिश्चित है।
5. $500 बिलियन ख़रीदारी — हक़ीक़त या दिखावा?
ट्रम्प ने दावा किया कि भारत 5 साल में $500 बिलियन (लगभग ₹42 लाख करोड़) के अमेरिकी उत्पाद ख़रीदेगा। विशेषज्ञों ने इसे “आकांक्षात्मक” (aspirational) बताया है। Carnegie Endowment for International Peace के उपाध्यक्ष Evan Feigenbaum ने कहा कि विश्लेषकों को इन आंकड़ों को गंभीरता से नहीं, बल्कि महत्वाकांक्षी लक्ष्य के रूप में देखना चाहिए। संदर्भ के लिए — भारत का कुल वार्षिक सरकारी बजट लगभग $590 बिलियन है।
6. किसानों और विपक्ष की प्रतिक्रिया
🚜 संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)
समझौते को “विश्वासघात” (betrayal) बताया। कहा कि अमेरिकी सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद भारतीय किसानों को तबाह करेंगे। 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।
🌾 भारतीय किसान संघ (BKS)
RSS-सम्बद्ध संगठन ने भी चिंता जताई और GM उत्पादों पर स्पष्टता की मांग की। DDGS और सोयाबीन तेल आयात पर आपत्ति दर्ज कराई।
🏛️ कांग्रेस पार्टी
जयराम रमेश ने वाणिज्य मंत्री के बचाव को “हद से ज़्यादा चालाकी भरा” बताया। “अतिरिक्त उत्पादों” की अस्पष्टता पर सवाल उठाया। कहा कि लाखों सोयाबीन किसानों की आजीविका ख़तरे में है।
✊ किसान नेता राकेश टिकैत
“किसानों से कोई चर्चा नहीं की गई। यह व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र पर करारा वार है।” — राकेश टिकैत (Reuters, 11 Feb 2026)
12 फरवरी 2026 को देशभर में किसानों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया — पंजाब से तमिलनाडु तक, पटना से बेंगलुरु तक। संसद के बाहर भी विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। यह 2020-21 के किसान आंदोलन की याद दिलाता है, जब किसानों ने तीन कृषि कानून रद्द करवाए थे।
7. हरियाणा और जींद जिले पर प्रभाव
हरियाणा कृषि प्रधान राज्य है। जींद जिले के अधिकांश किसान गेहूं, सरसों, धान, मक्का और ज्वार की खेती करते हैं। इस समझौते से:
🌾 ज्वार और मक्का किसान: अमेरिकी DDGS और लाल ज्वार के शून्य शुल्क पर आयात से पशु चारा बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे स्थानीय ज्वार और मक्का की कीमतें और गिरेंगी।
🥜 सरसों तेल किसान: सोयाबीन तेल का सस्ता आयात अप्रत्यक्ष रूप से सरसों तेल की मांग और कीमतों को प्रभावित करेगा। हरियाणा के सरसों किसानों के लिए यह चिंताजनक है।
🍎 फल किसान: अमेरिकी सेब और फलों के शुल्क-मुक्त आयात से स्थानीय बागवानी प्रभावित होगी।
🐄 पशुपालन: DDGS का आयात पशु चारा बाज़ार को प्रभावित करेगा, जो जींद जिले के किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।
8. अनुत्तरित प्रश्न — जो सरकार ने नहीं बताया
1. “Additional Products” (अतिरिक्त उत्पाद) में कौन-कौन से उत्पाद शामिल हैं? क्या डेयरी, मुर्गी पालन, और GM फ़सलें भविष्य में शामिल होंगी?
2. समझौते का पूरा पाठ (full text) संसद में क्यों नहीं रखा गया?
3. “Non-tariff barriers को address करने” का क्या मतलब है? क्या FSSAI के GM खाद्य सुरक्षा मानक कमज़ोर किए जाएंगे?
4. $500 बिलियन ख़रीदारी का वित्तीय बोझ कौन उठाएगा? यह भारत के कुल वार्षिक बजट के लगभग बराबर है।
5. किसान संगठनों से कोई परामर्श क्यों नहीं किया गया?
6. EU ने बीफ़, चावल, चीनी और डेयरी को अपने समझौते से बाहर रखा — भारत ने ऐसी सुरक्षा क्यों नहीं ली?
9. निष्कर्ष — किसानों की क़ीमत पर सौदा
यह समझौता स्पष्ट रूप से असमान है। एक ओर अमेरिका को 140 करोड़ लोगों के बाज़ार तक पहुंच मिली — कृषि, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी सभी क्षेत्रों में। दूसरी ओर भारत को अपने ही पुराने शुल्क दर (3.3%) से भी अधिक (18%) शुल्क पर निर्यात करना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं कहा: “भारत अपने किसानों, डेयरी किसानों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा।” — लेकिन संयुक्त वक्तव्य के शब्द इसके विपरीत कहानी कहते हैं।
भारतीय किसान पहले ही MSP न मिलने, बढ़ती लागत और जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी सब्सिडी-प्राप्त कृषि उत्पादों के लिए बाज़ार खोलना उनके लिए विनाशकारी हो सकता है।
अपनी आवाज़ उठाएं
किसानों के हक़ की लड़ाई में साथ दें
समझौते का पूरा पाठ संसद में रखा जाए। किसानों से परामर्श हो। कृषि क्षेत्र की रक्षा हो। RTI और PIL के माध्यम से पारदर्शिता की मांग करें।
📚 स्रोत — Sources (Public Documents)
1. White House — United States-India Joint Statement (6 Feb 2026)
2. White House — Fact Sheet: US-India Historic Trade Deal (6 Feb 2026)
3. USTR — American Farmers Applaud Trade Deals (Feb 2026)
4. Business Standard — India-US Trade Deal: Duty cuts on DDGS, soybean oil raise concerns (7 Feb 2026)
5. Business Standard — Farmer groups fear backdoor entry of GM crops via DDGS (7 Feb 2026)
6. Reuters (via Bilyonaryo) — Indian corn, soybean prices fall as door opened to US imports (11 Feb 2026)
7. Bloomberg — Indian Farmers Protest Against Modi’s Trade Deal With Trump (12 Feb 2026)
8. Washington Post — Indian unions and farmers stage a nationwide strike (12 Feb 2026)
9. Al Jazeera — Modi, Trump announce India-US ‘trade deal’ (3 Feb 2026)
10. CNBC — The facts and frictions of the US-India trade deal (5 Feb 2026)
11. The Quint — India-US Trade Deal: Why Agriculture Holds the Real Leverage (Feb 2026)
12. Outlook Business — India’s Political Hot Potato: DDGS Under the India-US Deal (Feb 2026)
13. Mongabay India — India-US interim trade deal triggers farmer concern (Feb 2026)
14. Morgan Lewis — US-India Trade Deal Cuts Tariffs, Eases Tensions (Feb 2026)
15. DTN Progressive Farmer — US-India Deal Suggests Greater Ag Exports (9 Feb 2026)
16. Cato Institute — Comparison of India-US and India-EU deals (cited in DTN, Feb 2026)
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज़ों — व्हाइट हाउस संयुक्त वक्तव्य, USTR फैक्ट शीट, और प्रतिष्ठित समाचार स्रोतों — के आधार पर तैयार किया गया है। लेखक के विचार उनके अपने हैं।