हरियाणा राज्यसभा चुनाव 2026
भाजपा की चाल उल्टी पड़ी — धनबल से कांग्रेस तोड़ने की कोशिश नाकाम, कांग्रेस ने अग्नि-परीक्षा पार की!
16 मार्च 2026 की रात हरियाणा की राजनीति में जो तमाशा हुआ — उसनै तो सारे हिसाब-किताब उल्टे कर दिए! चंडीगढ़ की विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के नाम पर जो ड्रामा हुआ, वो किसी फिल्म तैं कम कोन्या था। नतीजे रात 2 बजे आए — पूरे 8 घंटे की देरी से! भाजपा ने धनबल और सत्ता के बल पर कांग्रेस की सीट छीनने का पूरा प्रयास किया — पर नाकाम रही। आओ समझते हैं कि कैसे भाजपा ने एक सीट जीतकै भी असली गेम हारी, और कांग्रेस ने क्रॉस-वोटिंग के बावजूद अपनी सीट बचा ली।
🔢 अंकगणित: किसके कित्ते गोटे थे?
| पार्टी / गुट | विधायक | वोट डाले | स्थिति |
|---|---|---|---|
| भाजपा भारतीय जनता पार्टी | 48 | 48 (1 अमान्य) | ✅ संजय भाटिया जीते |
| कांग्रेस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 37 | 37 (4 अमान्य, 5 क्रॉस-वोट) | ✅ कर्मवीर सिंह बौद्ध जीते |
| INLD इंडियन नेशनल लोक दल | 2 | 0 (बॉयकॉट) | 🚫 वोट नहीं डाला |
| निर्दलीय आजाद विधायक | 3 | 3 (नांदल को) | ❌ नांदल 0.67 वोट से हारे |
हरियाणा विधानसभा में 90 सीटां हैं। राज्यसभा की दो सीटां पर चुनाव था — जीतण खातर 31 वोटां का कोटा चाहिए। भाजपा के 48 में से एक सीट तो पक्की थी — संजय भाटिया की। पर भाजपा ने लालच करी — दोनूं सीटां पै कब्जा करण की रणनीति बनाई।
🎯 सतीश नांदल — भाजपा हरियाणा उपाध्यक्ष का “निर्दलीय” दाँव
भाजपा ने अपने हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल को मैदान में उतारा — बिना पार्टी छोड़े, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में। नांदल साहब 2019 में गढ़ी सांपला-किलोई से भाजपा की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, जहाँ वे हुड्डा साहब से हारे थे। इससे पहले वे INLD में भी रह चुके हैं।
तीन निर्दलीय विधायक — सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादयान, और राजेश जूण — ने नांदल को समर्थन दे दिया। भाजपा की रणनीति साफ थी — धनबल और सत्ता के बल पर कांग्रेस के विधायक तोड़ो, और नांदल को दूसरी सीट पर बिठा दो। यानी पार्टी का उपाध्यक्ष, पार्टी छोड़े बिना, निर्दलीय बनकै चुनाव लड़ रहा है — यो कौन सी लोकतांत्रिक परंपरा है?
हरियाणवी कहावत
🏔️ कांग्रेस की रणनीति: हिमाचल में विधायकां की रखवाली!
हुड्डा साहब नै अपने विधायकां की नब्ज पकड़ राखी थी। उन्हें पता था — भाजपा धनबल और ताकत दोनूं से तोड़ण की कोशिश करैगी। तो शुक्रवार की रात कांग्रेस के 31 विधायकां को बसों में हिमाचल प्रदेश के रिसॉर्ट में भेज दिया गया। जैसे गाडरिया अपनी भेड़ां नै भेड़ियां तैं बचाण खातर पहाड़ पै लै जावै — वैसे ही हुड्डा साहब ने अपने विधायकां की रखवाली करी।
दीपेंदर हुड्डा विधायकां के साथ हिमाचल गए, और हुड्डा साहब चंडीगढ़ में बैठ कै पूरी कमान संभाली। सोमवार की सुबह काफिले में सारे विधायक कसौली से चंडीगढ़ आए — सीधे हुड्डा साहब के निवास पर — और फेर विधानसभा में वोट डालण गए। 6 विधायक निजी कारणों से हिमाचल नहीं गए थे — पर सबने समय पर वोट डाला।
हरियाणवी मुहावरा
🤔 INLD का बॉयकॉट — किसका फायदा, किसका नुकसान?
अभय चौटाला ने एलान कर दिया कि INLD वोट नहीं करेगी। दो विधायक — आदित्य देवीलाल और अर्जुन चौटाला — विधानसभा ही नहीं पहुँचे। अभय साहब ने बड़ी-बड़ी बातें कहीं — “हम चौधरी देवीलाल की विचारधारा पर चलते हैं, दिल्ली की गलियों की राजनीति पर नहीं।”
पर सवाल यो है — इस बॉयकॉट से फायदा किसको पहुँचाने की कोशिश की गई? सीधी सी बात है — अगर INLD के दो वोट नांदल को मिल जाते, तो नांदल की वोट वैल्यू 27.33 से बढ़कर 29.33 हो जाती, और कुल वैध वोट बढ़ने से कोटा भी बदल जाता। भला हो भाजपा के उस एक वोट का जो अमान्य हो गया — वरना INLD के बॉयकॉट ने तो विनिंग मार्जिन इतना कम कर ही दिया था कि नांदल बाल-बाल हारे!
🔍 INLD की दोहरी मार — सोचने वाली बात
पहली मार: बॉयकॉट करके भाजपा समर्थित उम्मीदवार को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुँचाने की कोशिश की — वोट न डालकर कांग्रेस का विनिंग मार्जिन कम कर दिया।
दूसरी मार: फिर भी नांदल जीत नहीं पाए — तो ना सीट भाजपा को मिली, ना INLD के वोट किसी काम आए। दोनूं हाथां तैं गई!
और सबसे बड़ी बात: ऊपर से विधानसभा में राज्यसभा चुनाव पर चर्चा का प्रस्ताव ले आए! भाई, वोट डाली नहीं — और अब चुनाव पर चर्चा चाहिए? जिस खेल में खेले ही नहीं, उस पर समीक्षा का अधिकार कैसा?
अगर INLD को पता होता कि नांदल हारेंगे, तो शायद वोट दे ही देते! पर अब ना इधर के रहे, ना उधर के।
हरियाणवी तंज
🎭 वोटिंग के बाद का तमाशा — रात भर का ड्रामा!
🐍 क्रॉस-वोटिंग: कांग्रेस में घर के भेदी!
सबसे दुखद बात यो रही कि कांग्रेस के अपने ही पाँच विधायकां ने पार्टी लाइन के विरुद्ध वोट दिया — भाजपा समर्थित सतीश नांदल को वोट दे दिया। चार और विधायकां के वोट अमान्य हो गए — यानी कांग्रेस ने कुल 9 वोट बर्बाद करे! 37 में से 9 — यो 24 प्रतिशत तैं ज्यादा है।
आज (19 मार्च) कांग्रेस की अनुशासन समिति ने चार विधायकां को शो-कॉज नोटिस जारी करे हैं:
भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नेता प्रतिपक्ष
📊 गणित जो भाजपा को चुभेगी!
🔢 अंतिम गणित — वोट वैल्यू ब्रेकडाउन
कुल वैध वोट: 83 | कुल वोट वैल्यू: 8300 | विजय कोटा: 27.67
| उम्मीदवार | पार्टी | पहली पसंद वोट | कुल वोट वैल्यू | नतीजा |
|---|---|---|---|---|
| संजय भाटिया | भाजपा | 39 | 39 (सरप्लस → नांदल) | 🏆 विजयी |
| कर्मवीर सिंह बौद्ध | कांग्रेस | 28 | 28.00 | 🏆 विजयी (0.33 से ऊपर) |
| सतीश नांदल | निर्दलीय (भाजपा उपाध्यक्ष) | 16 | 27.33 (16 + भाटिया सरप्लस) | ❌ पराजित (0.67 से!) |
| अमान्य रद्द वोट | 5 | — (4 कांग्रेस + 1 भाजपा) | 🚫 गिनती से बाहर | |
अब गणित समझो — अगर भाजपा का वो एक अमान्य वोट गिन लिया जाता, तो नांदल कोटे से ऊपर निकल जाते। अगर INLD के दो विधायक भी वोट दे देते, तो कांग्रेस का हारना तय था। पर ना INLD ने खुलकर साथ दिया, ना भाजपा अपने सारे वोट बचा पाई — और नांदल सिर्फ 0.67 वोट से हार गए। हरियाणा राज्यसभा इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक!
💀 भाजपा गेम कैसे हारी?
भाजपा ने एक सीट जीत ली — संजय भाटिया राज्यसभा में पहुँच गए। पर असली गेम तो दोनूं सीटां जीतण की थी! अपने प्रदेश उपाध्यक्ष को निर्दलीय बनाकै खड़ा करना, कांग्रेस विधायकां को तोड़ना — यो सब दूसरी सीट छीनण खातर किया गया। और इसमें भाजपा बुरी तरह नाकाम रही:
❌ भाजपा की तीन बड़ी चूकें
1. INLD को साध नहीं पाए: INLD से वोट डलवाने की जगह बायकाट करवा दिया! अगर वोट डलवा लेते तो नांदल सांसद होते लेकिन खुद की भूल से खुद की मैनेजमेंट खराब हो गयी!
2. अपना एक वोट अमान्य करवा बैठे: 48 विधायकां में से एक का वोट भी सही से नहीं पड़ पाया — यो भारी लापरवाही रही।
3. धनबल से कांग्रेस के 9 वोट तुड़वाकै भी हारे: 5 क्रॉस-वोट + 4 अमान्य — इतना सब करकै भी दूसरी सीट हाथ नहीं आई!
हरियाणवी कहावत
🔥 कांग्रेस की अग्नि-परीक्षा — जीत तो गए, पर सबक बड़ा है!
कांग्रेस ने सीट बचा ली — कर्मवीर सिंह बौद्ध, एक दलित कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, राज्यसभा पहुँच गए। हुड्डा साहब ने इसे “अग्नि-परीक्षा” पार करना बताया — और सही कहा।
पर 37 में से 9 वोट बर्बाद हों — 5 गद्दारी में और 4 अमान्य — तो यो जीत कम, चेतावनी ज्यादा है! कांग्रेस जीती सिर्फ इसलिए कि कम वैध वोटों ने कोटा भी कम कर दिया, और बौद्ध जी के 28 वोट कोटे से ऊपर रह गए। यो किस्मत और रणनीति का मिला-जुला नतीजा था।
कांग्रेस को अपने घर की सफाई करणी पड़ैगी। जो विधायक पार्टी लाइन छोड़ कै भाजपा के धनबल के आगे झुक गए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। शो-कॉज नोटिस पहला कदम है — पर असली सवाल यो है कि पार्टी में यो अनुशासनहीनता आई कहाँ से?
🎤 मुख्यमंत्री नायब सैणी — दूसरां पर तीर, अपनी चूक पर चुप!
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैणी ने रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस करी। बधाई दी दोनूं उम्मीदवारां को, पर फेर कांग्रेस पर हमला बोल दिया — “कांग्रेस को अपने विधायकां पर भरोसा नहीं, इसलिए उन्हें रिसॉर्ट में बंद करके रखा!”
सैणी साहब, ये बात तो ठीक कही — पर आपकी पार्टी ने अपने उपाध्यक्ष को निर्दलीय बनाकै मैदान में उतारा, धनबल से कांग्रेस के 5 विधायक तोड़े, 4 और के वोट अमान्य करवाए — फिर भी दूसरी सीट नहीं जीत पाए। इस पर क्यूँ चुप हो?
हरियाणवी तंज
📚 इतिहास गवाह है — ये भाजपा का पुराना खेल है!
ये पहली बार नहीं कि हरियाणा राज्यसभा चुनाव में ऐसा ड्रामा हुआ है:
| साल | क्या हुआ | नतीजा |
|---|---|---|
| 2016 | कांग्रेस के 14 विधायकां के वोट अमान्य — गलत पेन इस्तेमाल हुआ | भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा जीते |
| 2022 | कांग्रेस के 1 विधायक का वोट अमान्य | अजय माकन हारे, भाजपा समर्थित कार्तिकेय शर्मा जीते |
| 2026 | कांग्रेस के 4 वोट अमान्य + 5 क्रॉस-वोट | कांग्रेस बाल-बाल बची! (0.67 वोट से) |
तीन बार — 2016, 2022, और 2026 — हर बार कांग्रेस के वोट अमान्य हुए, हर बार भाजपा समर्थित “निर्दलीय” उम्मीदवार को फायदा पहुँचा। क्या यो इत्तेफाक है, या एक तय पैटर्न?
⚖️ निष्कर्ष: हरियाणा की राजनीति का आईना
एक — भाजपा के पास 48 विधायक हैं, सत्ता है, धनबल है — पर लालच में आकै दूसरी सीट का जुगाड़ करण गए और मुँह की खाई। एक सीट तो वैसे भी मिलणी थी — नांदल का ड्रामा करकै पार्टी की इज्जत गँवाई।
दो — कांग्रेस ने सीट बचाई, पर 9 वोटां का नुकसान बतावै सै कि पार्टी में अंदरूनी अनुशासन कमजोर है। अगर अगली बार विधानसभा चुनाव में ये हालत रही, तो भारी पड़ैगी।
तीन — INLD ने बॉयकॉट करकै भाजपा को फायदा पहुँचाने की कोशिश करी — भला हो भाजपा के उस अमान्य वोट का कि नांदल फेर भी नहीं जीत पाए। और अब विधानसभा में चर्चा का प्रस्ताव ले आए — जिस चुनाव में वोट नहीं डाली, उस पर चर्चा का नैतिक अधिकार कहाँ से आया?
चार — कर्मवीर सिंह बौद्ध की जीत एक सकारात्मक संदेश है — एक दलित कार्यकर्ता, जमीन से जुड़ा इंसान राज्यसभा में पहुँचा। यो लोकतंत्र की ताकत है।
भाजपा ने धनबल और सत्ता के बल पर गेम खेली — और हारी!
कांग्रेस ने अग्नि-परीक्षा पार करी, पर घर के भेदियां से निपटणा बाकी है।
INLD ने बॉयकॉट का नाम लेकै भाजपा की मदद करी — पर वो भी काम ना आई।
और जनता? जनता सब देख रही है! 👁️
तीनूं पार्टियां नै अपने-अपने आईने में झाँकणा चाहिए!
