सर छोटू राम का पाँच-सूत्री कार्यक्रम —
100 साल बाद भी अधूरा क्यों?
जब भ्रष्टाचार, किसान शोषण, धार्मिक कट्टरता और नौकरशाही के चंगुल से लड़ने के लिए छोटू राम ने एक रोडमैप तैयार किया था — वो आज जुलाना और जींद के लिए उतना ही प्रासंगिक है।
1926 में जब सर छोटू राम को पंजाब मंत्रिमंडल से बाहर किया गया — तो उन्होंने हार नहीं मानी। विपक्ष में बैठकर उन्होंने एक पाँच-सूत्री कार्यक्रम तैयार किया जो उस ज़माने की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती थी। आज — 100 साल बाद — जब मैं उस कार्यक्रम को पढ़ता हूं, तो लगता है यह जुलाना के लिए आज लिखा गया है।
वो दशक जब छोटू राम अकेले खड़े थे
प्रो. D.C. वर्मा की पुस्तक “Sir Chhotu Ram — Life and Times” में उस दौर का विवरण रोंगटे खड़े कर देता है। 1926 से 1936 तक — एक पूरा दशक — छोटू राम को जानबूझकर सत्ता के बाहर रखा गया। लाहौर का शहरी हिंदू लॉबी, नौकरशाही और सांप्रदायिक ताकतें — सब मिलकर इस एक आदमी को रोकने में लगे थे।
वो पल जो छोटू राम को छोटू राम बनाया
बचपन में जब पिता सुखीराम कर्ज माँगने साहूकार के पास गए — तो साहूकार ने अपना पंखा पिता की ओर फेंका और कहा — “हवा करो।” एक 10-11 साल के लड़के ने यह देखा। उस दिन उसने तय किया — यह अपमान जड़ से खत्म करना है।
वही लड़का बड़ा होकर Punjab Relief of Indebtedness Act लाया — जिसने लाखों किसानों को साहूकार के चंगुल से मुक्त किया। अपमान को ताकत बनाने वाले इंसान को इतिहास याद रखता है।
“सर छोटू राम नै कहा था — ‘जो अपमान झेलता सै, वो या तो टूट जाता सै या फिर फौलाद बन जाता सै।’ म्हारे दादा जी नै यो बात म्हनै सिखाई थी — अर आज म्हारे हर संघर्ष म्हं यो याद रहती सै।”
— अधि. रविन्द्र सिंह ढुल, जुलाना
पाँच-सूत्री कार्यक्रम — जो आज भी road map है
विपक्ष के उन दस वर्षों में छोटू राम ने सिद्धांतहीन राजनीति नहीं की। उन्होंने एक ठोस पाँच-सूत्री कार्यक्रम बनाया। प्रो. वर्मा ने इसे इन शब्दों में दर्ज किया है —
“Outside the Council Chhotu Ram drew a plan of action which revolved around a five-point programme. These included a sustained and vigorous campaign against corruption, a similar campaign against the exploitation of the peasantry, in particular and the rural population in general… the enlightenment of the people to save them from false propaganda of religious fanatics, organization of the rural people through an economic programme based on community of interests and to ensure full representation of the rural people in the elected bodies and government services.”
— प्रो. D.C. वर्मा, “Sir Chhotu Ram: Life and Times”
इन पाँच बिंदुओं को आज के जुलाना और जींद के संदर्भ में देखें —
भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान
पटवारी से लेकर मंत्री तक — छोटू राम ने भ्रष्ट तंत्र को सीधी चुनौती दी। उनके फाइल नोटिंग आज भी प्रशासन में मॉडल माने जाते हैं।
किसान शोषण के खिलाफ संघर्ष
साहूकार की जगह आज बैंक है। जमीन नीलामी की जगह SARFAESI Act है। पर किसान का दर्द वही है।
धार्मिक उन्माद से जागरूकता
छोटू राम का सबसे साहसी काम — धर्म को राजनीति से अलग रखना। हिंदू, मुस्लिम, सिख किसान एक साथ — Unionist Party का आधार।
ग्रामीण एकता और संगठन
Zamindara League — हर गांव में शाखा, हर जिले में इकाई। किसान को संगठित शक्ति में बदलना।
सेवाओं में ग्रामीण प्रतिनिधित्व
ICS में शहरी वर्चस्व तोड़ना — छोटू राम ने माँग की कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के अधिकारी हों।
“सर छोटू राम नै विपक्ष म्हं बैठकर यो पाँच-सूत्री कार्यक्रम बनाया था। म्हनै भी विधानसभा म्हं विपक्ष म्हं बैठकर यो लड़ाई लड़णी पड़े — तो लड़ूँगा। पर किसान का साथ कोन्या छोड़ूँगा।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल, जुलाना
Kashmir की कुर्सी ठुकराई — सिद्धांत नहीं बेचे
यह प्रसंग पढ़कर मैं हर बार रुक जाता हूं। 1927 में पंजाब के गवर्नर सर मैल्कम हेली ने छोटू राम को Kashmir का Prime Minister बनाने का प्रस्ताव दिया। यह उस ज़माने का सबसे बड़ा सम्मान था। पर छोटू राम ने क्या जवाब दिया?
“Chhotu Ram, however, was not tempted. He flatly rejected the offer and told the Governor that while he was very grateful to the Viceroy and to him, his mission in life was to work for the backward rural people. He was accustomed to a very simple life and his legal income was enough to meet his few needs. Hailey was astounded.”
— प्रो. D.C. वर्मा
गवर्नर हेली हैरान रह गए — क्योंकि उनके अनुभव में कोई भी नेता ऐसी कुर्सी नहीं ठुकराता। पर छोटू राम एक ऐसे शख्स थे जिन्हें खरीदा नहीं जा सकता था।
“सर छोटू राम नै Kashmir की कुर्सी ठुकरा दी — क्यूँकि उनका मिशन जींद-रोहतक के किसान की सेवा था। म्हनै भी AAG की कुर्सी छोड़ी — क्यूँकि जिब किसानां पर जुल्म होया, उस सरकार का हिस्सा बणा नहीं जा सकता था। यो उसूल छोटू राम जी तैं सीखे हैं।”
— अधि. रविन्द्र सिंह ढुल
धर्म और राजनीति — छोटू राम की सबसे साहसी लड़ाई
जिस ज़माने में हर तरफ सांप्रदायिक उन्माद था — उस ज़माने में छोटू राम ने हिंदू, मुस्लिम और सिख किसानों को एक मंच पर खड़ा किया। उनका नारा था — जमींदार एक है, उसका दुश्मन एक है — चाहे वो किसी भी धर्म का हो।
“The Kisan is the centre of all economic and political life in the Punjab. The prosperity of every other section depends on the prosperity of the Kisan… If the Kisan survives, everybody survives. If he dies then everything will get destroyed.”
— सर छोटू राम
और उन्होंने धार्मिक नेताओं को सीधे कहा — “Do whatever you feel in observing your religious tenets but keep it strictly outside politics.”
आज 2026 में — जब जुलाना और जींद में हर चुनाव में जाति और धर्म का कार्ड खेला जाता है — छोटू राम का यह संदेश सबसे ज़रूरी है। किसान की कोई जाति नहीं होती — उसकी बस एक पहचान होती है — वो जो अपने हाथों से उगाता है, उसे उसका उचित दाम मिले।
“जाट, रोड़, अहीर, ब्राह्मण, मुसलमान — सब किसान एक हैं। जिब MSP नहीं मिलती — तो सब किसानां नै नहीं मिलती। जिब फसल बीमा का धोखा होता सै — तो सब किसानां के साथ होता सै। यो छोटू राम जी का सबसे बड़ा सबक सै।”
— अधि. रविन्द्र सिंह ढुल
छोटू राम की लड़ाई का टाइमलाइन — हर कदम पर साहस
“बेचारा ज़मींदार” — किताब जो सरकार को डराती थी
जब छोटू राम ने किसान शोषण पर लेख लिखे तो सरकार ने धमकी दी — इन लेखों के लिए मुकदमा चलाएंगे। छोटू राम ने क्या किया? प्रो. वर्मा लिखते हैं —
“The government wanted Chhotu Ram to give up the various campaigns he had launched simultaneously. They threatened to prosecute him for the various articles. Far from being intimidated, Chhotu Ram brought out the articles in the form of a booklet under the heading ‘Bechara Zamindar’.”
— प्रो. D.C. वर्मा
सरकार ने डराया — तो छोटू राम ने उन्हीं लेखों को किताब बना दिया। यह साहस है। यह वो संदेश है जो मैं अपने हर कदम में याद रखता हूं।
“3000 RTI दायर की — कई बार धमकियाँ मिलीं। PIL लड़ी — सरकार ने अड़ंगे लगाए। AAG की कुर्सी छोड़ी — लोगों ने पागल कहा। पर सर छोटू राम नै सिखाया था — जो डर गया, वो हार गया। जो डटा रहा, उसे इतिहास याद रखता सै।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल
छोटू राम और आज का जुलाना — क्या बदला, क्या नहीं
📜 छोटू राम के ज़माने में
- साहूकार ब्याज पर ब्याज लगाता था
- किसान विधान परिषद् में बेआवाज़ था
- नौकरशाही शहरी वर्ग की सेवक थी
- धर्म को राजनीति में घुसाया जाता था
- किसान का बच्चा पढ़ नहीं सकता था
- Bhakra जैसी परियोजनाएँ कागज़ में थीं
🗓️ आज 2026 में — जुलाना
- बैंक SARFAESI से जमीन कुर्क करता है
- किसान मुद्दे विधानसभा में नहीं उठते
- HKRN ठेकेदारी — नौकरी बिना अधिकार
- जाति और धर्म से वोट की राजनीति
- जुलाना में ITI-कॉलेज नहीं
- NH-352 बना — SEZ की माँग अधूरी
छोटू राम की विरासत से प्रेरित — म्हारा संकल्प
सर छोटू राम की जीवनी पढ़कर एक बात बार-बार मन में आती है — वो अकेले थे। पर डरे नहीं। शहरी लॉबी थी उनके खिलाफ, नौकरशाही थी उनके खिलाफ, सांप्रदायिक ताकतें थीं उनके खिलाफ। पर किसान उनके साथ था — और यही काफी था।
मेरे पास भी वही किसान है — जुलाना का, जींद का। और उसी किसान की ताकत से यह संकल्प लेता हूं —
✅ छोटू राम के पाँच-सूत्री से प्रेरित — आज के पाँच संकल्प
- भ्रष्टाचार पर RTI की तलवार: जैसे छोटू राम ने “बेचारा ज़मींदार” लिखकर सरकारी भ्रष्टाचार उजागर किया — वैसे ही 3000+ RTI दायर कर के। विधायक बनकर विधानसभा में हर विभाग का ऑडिट माँगूँगा।
- किसान शोषण पर कानूनी प्रहार: जैसे छोटू राम ने Punjab Relief of Indebtedness Act लाया — वैसे ही MSP कानूनी गारंटी, बीमा सुधार और कर्ज राहत आयोग के लिए लड़ूँगा।
- जाति-धर्म से ऊपर — जुलाना एकजुट: छोटू राम ने हिंदू-मुस्लिम-सिख किसान को एक किया। जुलाना में हर जाति, हर धर्म का किसान — एक मंच पर।
- ग्रामीण प्रतिनिधित्व: जैसे छोटू राम ने ICS में ग्रामीण प्रतिनिधित्व माँगा — वैसे ही HKRN नियमितीकरण, पेपर लीक रोको, ESM भर्ती में पारदर्शिता — हर नौजवान को उसका हक।
- संगठन और जागरूकता: Zamindara League की तर्ज पर — हर पंचायत में किसान समिति, हर तहसील में RTI सहायता केंद्र। जुलाना का किसान जागरूक होगा तो बदलाव आएगा।
“जब छोटू राम दस साल विपक्ष म्हं रहे — तो उन्होंनें हार नहीं मानी। जब म्हारे पिताजी विपक्ष म्हं रहे — तो 120 करोड़ का काम करवाया। अर म्हं भी — जहाँ भी बैठूँ — किसान का काम होगा। यो छोटू राम जी का रास्ता सै, यो म्हारा रास्ता सै।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल, जुलाना विधानसभा
दीन-बंधु सर छोटू राम की जय। जय किसान। जय जुलाना। 🌾