किसान की लाश पर सियासत — कब तक?
MSP गारंटी, फसल बीमा का सच, कर्ज का जाल — और एक वकील की लड़ाई जो सरकारी कुर्सी छोड़कर शुरू हुई
माटी का बेटा — माटी की पीड़ा
मैं बचपन से देखता आया हूं — किसान की मेहनत, किसान का संघर्ष और किसान के साथ हुई बेइज्जती। म्हारे दादा चौधरी दलसिंह जी ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी और जुलाना को विकास का रास्ता दिखाया। म्हारे पिता चौधरी परमिन्दर सिंह ढुल ने विपक्ष में रहते हुए भी 5500 किसानों की जमीन बैंक नीलामी से बचाई। यह कोई आंकड़ा नहीं — 5500 परिवारों की जिंदगी है।
आज उसी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मेरी है। 22 साल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत की — किसान के लिए, मजदूर के लिए, उस गरीब के लिए जिसके पास आवाज़ नहीं थी। 3000 से ज्यादा RTI दायर किए — सरकारी झूठ बेनकाब करने के लिए।
और 2021 में जब किसानों पर लाठियां बरसाई गईं, जब सरकार ने तीन काले कानून थोपे — तो मैंने अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) की सरकारी कुर्सी छोड़ दी। कुर्सी से बड़ा होता है ज़मीर। और म्हारे खून में जुलाना बसता है — कोई सरकारी पद नहीं।
हरियाणा का किसान — हकीकत की तस्वीर
नेता भाषणों में “अन्नदाता” कहते हैं। पर जमीनी सच्चाई क्या है? जुलाना और जींद के किसानों से जब मिलता हूं — RTI कैंप में, गांव की चौपाल पर, अदालत के बाहर — तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
📊 जमीनी आंकड़े — जींद जिला
पानी का संकट — खेती की जड़ पर वार
जुलाना तहसील में भूमिगत जल 300 फुट से नीचे जा चुका है — और वो भी खारा। नहर-आधारित सिंचाई का जाल टूटा पड़ा है। ₹60 करोड़ की सिंचाई योजनाएं कागजों में हैं। RTI दाखिल की तो पता चला — निधि जारी हुई, काम नहीं हुआ। ठेकेदार और अफसर मिले हुए हैं।
जलभराव — बर्बादी का दूसरा नाम
एक तरफ सूखा, दूसरी तरफ जलभराव। जुलाना के कई गांवों में बरसात में हजारों एकड़ फसल डूब जाती है। ड्रेनेज नेटवर्क वर्षों से बंद पड़ा है। किसान दोहरी मार झेल रहा है — न बारिश से बचाव, न सूखे से राहत।
🔍 RTI से सामने आया सच
मैंने जींद जिले में ड्रेनेज नेटवर्क मरम्मत पर RTI दाखिल की। जवाब में पता चला — विभाग के पास फंड है, पर 3 साल से टेंडर ही नहीं हुआ। किसान डूब रहा है और फाइलें दफ्तर में सड़ रही हैं।
“किसान तीन चीज़ें मांगता है — फसल का सही दाम, खेत में पाणी, अर बैंक का कर्ज माफ। यो तीनों उसका हक सै — भीख नहीं।”
MSP — वो वादा जो आज तक अधूरा है
2021 में जब किसान दिल्ली की सरहदों पर बैठे थे — सर्दी में, धूप में, बरसात में — तो पूरा देश देख रहा था। तीन काले कृषि कानून वापस हुए — पर MSP की कानूनी गारंटी आज तक नहीं मिली।
सरकार कहती है MSP मिलती है। असलियत यह है कि हरियाणा में सरकारी खरीद सिर्फ गेहूं और धान तक सीमित है। सब्जी, तिलहन, दालें — सब बाज़ार भाव पर। बाज़ार में भाव क्या होता है? लागत से भी कम।
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट 2006 में आई थी। C2+50% फॉर्मूला — यानी उत्पादन लागत से 50% ज्यादा दाम। 20 साल बाद भी लागू नहीं हुई। क्यों? क्योंकि जो सरकार में बैठे हैं, उनके लिए किसान सिर्फ वोटबैंक है — इंसान नहीं।
⚠️ MSP की असली समस्याएं
- सिर्फ 2 फसलें (गेहूं-धान) — बाकी 21 फसलें बाज़ार के रहम पर
- कानूनी गारंटी नहीं — सरकार जब चाहे MSP बंद कर सकती है
- C2+50% फॉर्मूला नहीं — असली लागत का हिसाब नहीं
- प्राइवेट व्यापारी MSP से कम खरीदते हैं — कोई सजा नहीं
- सरकारी मंडी में किसान को कई दिन इंतजार — फसल खराब होती है
“MSP कानून बन जाए तो क्या बिगड़ेगा? — सरकार जवाब नहीं देती। क्योंकि जवाब होता तो किसान सड़क पर क्यों बैठता?”
फसल बीमा — सबसे बड़ा धोखा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का ढिंढोरा पीटा जाता है। पर जुलाना के किसान से पूछो — “क्लेम मिला?” जवाब मिलेगा — “कागज अधूरे थे।” या “समय सीमा निकल गई।” या “बीमा कंपनी ने मना कर दिया।”
मैंने RTI दाखिल की — पूछा कि जींद जिले में 2022-23 में कितने क्लेम दाखिल हुए और कितने मंजूर हुए। जवाब चौंकाने वाला था: 60% से ज्यादा क्लेम या तो अस्वीकृत हुए या लंबित हैं। बीमा कंपनियों का मुनाफा हर साल बढ़ रहा है — किसान को मिल क्या रहा है?
🔍 RTI से सामने आया सच — फसल बीमा
मेरी RTI के जवाब में पाया गया कि कई गांवों में सरकारी रिकॉर्ड में “क्लेम भुगतान हो गया” दर्ज है — पर किसान को पैसे नहीं मिले। पैसे कहां गए? यही सवाल म्हारी PIL का आधार है।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं — संगठित भ्रष्टाचार है। और जब तक इसके खिलाफ कोई विधानसभा में आवाज़ नहीं उठाएगा, यह लूट जारी रहेगी।
कर्ज का जाल — पीढ़ियों की बर्बादी
जुलाना का किसान आज औसतन ₹2-3 लाख के कर्ज में डूबा है। बैंक कर्ज, साहूकार कर्ज, बीज-खाद का उधार। जब फसल का दाम लागत से कम मिले — तो कर्ज कैसे उतरेगा?
हरियाणा में किसान आत्महत्या के आंकड़े सरकार छिपाती है। RTI दायर करो तो जवाब मिलता है — “यह कृषि विभाग का विषय नहीं।” कोई भी विभाग जिम्मेदारी नहीं लेता। पर किसान की लाश तो है — उसे कौन देखेगा?
BJP ने “किसान कर्ज माफी” का वादा किया था। असलियत? जुलाना जैसे क्षेत्रों में हजारों पात्र किसान योजना से बाहर रहे — “कागज अधूरे थे।” कागज अधूरे थे या नीयत?
“किसान के खाते में कुछ नहीं आया — पर नेताओं के खाते में वोट जरूर आ गए। यो कैसा न्याय सै?”
म्हारे संकल्प — किसान के लिए, जुलाना के लिए
खाली वादे नहीं — ठोस संकल्प। हर बिंदु पर पहले से लड़ाई जारी है — RTI में, हाईकोर्ट में, सड़क पर।
MSP कानूनी गारंटी
स्वामीनाथन C2+50% फॉर्मूला — हर फसल पर, हर किसान को, कानूनी बल के साथ
सिंचाई नेटवर्क पूर्ण
जुलाना की अटकी ₹60Cr नहर-सिंचाई योजनाएं — 18 महीने में पूरी। RTI से निगरानी।
फसल बीमा सुधार
30 दिन में क्लेम — नहीं तो ब्याज सहित। बीमा कंपनियों का सार्वजनिक ऑडिट।
किसान कर्ज राहत आयोग
किसान प्रतिनिधि शामिल हों। पात्रता में कागजी अड़चन नहीं — जमीन का हक सुरक्षित।
जलभराव से मुक्ति
हर गांव में ड्रेनेज सिस्टम — ठेकेदार जवाबदेह। काम अधूरा तो भुगतान नहीं।
मंडी में पारदर्शिता
ऑनलाइन नीलामी, लाइव भाव, किसान को SMS — बिचौलिए का खेल खत्म।
“म्हारे दादाजी कहते थे — जो किसान तै माटी छिन जावै, वो जड़ तै उखड़ ज्यावै।”
आज जुलाना का किसान उखड़ रहा है — पर अब और नहीं। जब तक म्हारे हाथ में कलम है, जब तक अदालत में आवाज़ है, जब तक जनता का साथ है — किसान की लड़ाई जारी रहेगी।
22 साल हाईकोर्ट में लड़े — 3000 RTI दायर किए — AAG की कुर्सी छोड़ी। अब जुलाना विधानसभा से यह लड़ाई नया मोड़ लेगी।
अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल | +91-9915442266 | ravinder4jind.in