दीन-बंधु की आवाज़ —
आज भी गूंजती है खेतों में
सर छोटू राम ने 100 साल पहले “बेचारा ज़मींदार” में जो लिखा — वो आज जुलाना और जींद के किसान की ज़िंदगी में वैसे ही सच है। एक वकील की नज़र से — विरासत और वर्तमान का संगम।
जब मैंने सर छोटू राम की “बेचारा ज़मींदार” पढ़ी — तो पहला एहसास यह हुआ कि यह किताब 1930 के दशक में नहीं लिखी गई। यह आज लिखी गई है। जुलाना के किसान के बारे में। जींद के खेतिहर मज़दूर के बारे में। उस बूढ़े बाप के बारे में जो मेरे पास बैंक का नोटिस लेकर आता है और कहता है — “बेटा, अब क्या होगा?”
वो शख्स जिसने किसान को ज़बान दी
सर छोटू राम — दीन-बंधु। हरियाणा के संगारिया गांव से निकला एक किसान का बेटा जो पंजाब की सियासत का सबसे बड़ा स्तंभ बना। वकालत से शुरुआत की — बिल्कुल मेरी तरह। रोहतक में प्रैक्टिस की। और फिर उन्होंने महसूस किया — जो असली लड़ाई है, वो अदालत में नहीं, विधानसभा में लड़नी होगी।
प्रो. D.C. वर्मा ने अपनी किताब “Sir Chhotu Ram — Life and Times” में लिखा है कि छोटू राम का किसान से पूर्ण तादात्म्य था। वो किसान के बिना अलग अस्तित्व नहीं रखते थे। यही वजह थी कि उनका असर इतना गहरा था।
“Frankly speaking, what actually is the peasant? A moving picture of sadness and pity, an embodiment of all woes. His heart is totally pierced by countless troubles, but he does not possess the faculty to express them. If he has a mouth there is no tongue in it. The moment the peasant gains the faculty of speech and learns to express himself, his exploiters will find the earth moving from under their feet.”
— सर छोटू राम, “बेचारा ज़मींदार”
यह पढ़कर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्योंकि आज भी — 100 साल बाद — जुलाना का किसान उसी मुँह से बोल नहीं पाता जिसमें ज़बान है। फसल बीमा का क्लेम अस्वीकृत हुआ — वो चुप रहता है। MSP से कम भाव मिला — वो चुप रहता है। बैंक ने नोटिस दिया — वो डर जाता है।
“सर छोटू राम नै किसान नै ज़बान दी थी — अर म्हनै उस ज़बान नै आगे बढ़ाणा सै। जिब किसान बोलेगा — तो सत्ता काँपेगी। यो छोटू राम जी का संदेश था, यो आज भी सच सै।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल, जुलाना
शाहूकार से जमीन बचाई — आज बैंक वही काम कर रहा है
छोटू राम के ज़माने में किसान का सबसे बड़ा दुश्मन था — शाहूकार (साहूकार)। ब्याज पर ब्याज, जमीन गिरवी, फिर नीलामी। छोटू राम ने Punjab Relief of Indebtedness Act और Moneylenders Act लाकर इस शोषण को कानूनी ज़ंजीरों में जकड़ा।
आज 2026 में — शाहूकार की जगह बैंक ने ले ली है। और बैंक के पास सरकारी संरक्षण है। SARFAESI Act के तहत बिना अदालत जाए जमीन कुर्क हो सकती है। मैंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में ऐसे दर्जनों मामले लड़े हैं — जहाँ किसान को पता भी नहीं था कि उसकी जमीन नीलामी की कगार पर है।
- Punjab Relief of Indebtedness Act (1934): शाहूकार के कर्ज की सीमा तय की — किसान की जमीन नीलाम नहीं हो सकती थी
- Punjab Moneylenders Act (1938): ब्याज दर पर नियंत्रण — शोषण पर कानूनी रोक
- Punjab Debtors Protection Act (1936): कर्ज में डूबे किसान को राहत और पुनर्वास
- Land Alienation Act का संरक्षण: गैर-कृषक वर्गों को कृषि भूमि खरीदने से रोका
- Bhakra Dam की नींव: किसानों की सिंचाई के लिए — जिस परियोजना का श्रेय आज तक अन्य लोग ले रहे हैं
“म्हारे पिताजी नै जुलाना म्हं 5500 किसानां की जमीन बैंक तै बचाई — यो छोटू राम जी की विरासत नै आगे बढ़ाणा था। अर म्हनै भी यो लड़ाई जारी रखणी सै — अदालत म्हं भी, विधानसभा म्हं भी।”
— अधि. रविन्द्र सिंह ढुल
शहरी बनाम ग्रामीण — वही पुरानी लड़ाई, नए रूप में
सर छोटू राम की सबसे बड़ी लड़ाई सिर्फ शाहूकार से नहीं थी — वो लड़ाई थी उस व्यवस्था से जो शहरी मध्यवर्ग और नौकरशाही के हित में बनाई गई थी। उन्होंने लिखा था कि अगर शहरी लोगों को कोई तकलीफ हो — तो अखबार चीखते हैं, सभाएं होती हैं, सरकार तुरंत एक्शन लेती है। पर किसान की तकलीफ? कोई नहीं पूछता।
“The government and the urban people belittle the sufferings of the rural people. These are of no concern to them. On the other hand, if there is any inconvenience to the urban people real or imaginary, they shout to the skies and the newspapers raise a hue and cry… But who bothers about the Kisan — poor, hungry, his back broken by taxes and debt?”
— सर छोटू राम
क्या यह आज सच नहीं है? दिल्ली-NCR में एक दिन बिजली गई — breaking news। जुलाना के गांवों में महीनों से नहर सूखी है — कोई headline नहीं। शहर में सड़क टूटी — MLA तुरंत पहुँचा। गांव में पीने का पानी नहीं — फाइल pending।
1920-45 में — सर छोटू राम के ज़माने में
- शाहूकार किसान की जमीन हड़पता था
- लगान (land revenue) पर किसान का कोई अधिकार नहीं
- विधान परिषद् में किसान का प्रतिनिधित्व शून्य
- अखबार शहरी पूंजीपतियों के हाथ में
- नौकरशाही शहरों से किसान को नियंत्रित करती थी
2026 में — आज भी वही हाल
- बैंक SARFAESI Act से जमीन कुर्क करता है
- MSP पर कानूनी गारंटी नहीं — बाज़ार का दबाव
- विधानसभा में किसान मुद्दे पर चर्चा न के बराबर
- मीडिया शहरी एजेंडे पर — किसान की खबर नहीं
- फसल बीमा क्लेम — अफसरशाही में फँसा
“बेचारा ज़मींदार” — वो पुकार जो आज भी अनसुनी है
छोटू राम ने “बेचारा ज़मींदार” को किसान के राजनीतिक घोषणापत्र के रूप में लिखा था। प्रो. वर्मा ने इसे 1848 के Communist Manifesto से तुलना की है — क्योंकि दोनों ने एक वर्ग को उसकी शक्ति का एहसास कराया।
छोटू राम ने इस पुस्तक में इकबाल की वो पंक्तियाँ उद्धृत कीं जो उन्हें बेहद प्रिय थीं और जो उन्होंने बार-बार किसान सभाओं में सुनाईं —
“O Thoughtless one, think of the future, some calamity is about to come; the elements are conspiring to destroy you; think of what is happening and is likely to happen… How long will you remain dumb? Create in yourself the power of speech, so that while you are on the ground, your voice resounds in the skies.”
— अल्लामा इकबाल (सर छोटू राम द्वारा उद्धृत)
और किसान को संबोधित करते हुए छोटू राम ने लिखा —
“You can save yourself, O Kisan! only through well-planned action, by loudly mouthing your grievances, not by showing weakness but strength, not by appearing helpless but by preparing yourself for struggle.”
— सर छोटू राम, “बेचारा ज़मींदार”
“सर छोटू राम नै 100 साल पहले कहा था — ‘किसान अपनी आवाज़ उठाए, तो सत्ता की ज़मीन हिल जाएगी।’ आज भी यही सच सै। जुलाना का किसान जिब बोलेगा — तो चंडीगढ़ सुनेगा, दिल्ली सुनेगी।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल
Bhakra Dam — छोटू राम की देन, श्रेय किसी और को
प्रो. वर्मा ने अपनी पुस्तक में एक बेहद दुखद तथ्य उजागर किया है — भाखड़ा डैम की परियोजना की नींव सर छोटू राम ने रखी थी, पर उनका नाम इस महाकाय परियोजना से कहीं जुड़ा नहीं।
यह हरियाणा के किसान के साथ ऐतिहासिक अन्याय है। जिस शख्स ने पंजाब के किसानों की सिंचाई के लिए भाखड़ा की कल्पना की — उसका नाम डैम पर नहीं। यह सिर्फ इतिहास का मसला नहीं — यह उस मानसिकता का सबूत है जो आज भी जारी है: किसान काम करे, श्रेय कोई और ले।
“जिसनै भाखड़ा की नींव रखी — उसका नाम डैम पर नहीं। जिसनै किसान की जमीन बचाई — उसकी याद म्हं कोई संस्थान नहीं। यो हरियाणा के किसान के साथ ऐतिहासिक नाइंसाफी सै — जिसे दुरुस्त करणा होगा।”
— अधि. रविन्द्र सिंह ढुल
Zamindara League से Congress तक — किसान आंदोलन का सफर
छोटू राम ने Zamindara League बनाई — हर जिले में, हर तहसील में, हर गांव तक शाखाएं। उनका लक्ष्य था — किसान को संगठित करना ताकि वो खुद अपनी राजनीतिक ताकत बने। उन्होंने कहा था कि जब तक किसान संगठित नहीं होगा — उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी।
2021 में जब लाखों किसान दिल्ली की सरहदों पर बैठे थे — तो वो छोटू राम की उसी भावना का विस्तार था। और मैंने उस वक्त AAG का पद छोड़ दिया — क्योंकि उस आंदोलन के खिलाफ खड़ी सरकार का हिस्सा बनना मेरे ज़मीर ने स्वीकार नहीं किया।
विरासत और वर्तमान — म्हारा संकल्प
मेरे दादा चौ. दलसिंह जी ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी। पिताजी चौ. परमिन्दर सिंह जी ने 5500 किसानों की जमीन बचाई। और मैंने 22 साल हाईकोर्ट में किसान के लिए PIL लड़ी, RTI दायर की, AAG की कुर्सी छोड़ी।
यह परंपरा छोटू राम की विरासत से जुड़ती है। वो भी वकील थे। उन्होंने भी अदालत और विधानसभा दोनों में लड़ाई लड़ी। उनका भी विश्वास था — किसान को ज़बान देना ही सबसे बड़ी सेवा है।
“If there is any life left in the Kisan and he wants to live with honor and self-respect, let him rise and organize himself. In the world of Love, O Bulbul, to remain silent is to invite death. This is a sphere where only loud clamor is appropriate.”
— सर छोटू राम, “बेचारा ज़मींदार” — अंतिम पंक्तियाँ
✅ छोटू राम की विरासत — आज की माँगें
- MSP कानूनी गारंटी: जो काम छोटू राम ने शाहूकार के शोषण से बचाने के लिए कानून बनाकर किया — वही आज MSP कानून से होगा। C2+50% फॉर्मूला लागू हो।
- किसान कर्ज राहत: छोटू राम ने Punjab Relief of Indebtedness Act बनाया था। आज SARFAESI Act के तहत बैंक द्वारा जमीन नीलामी पर रोक — जब तक किसान कर्ज राहत आयोग फैसला न करे।
- भाखड़ा का श्रेय: हरियाणा विधानसभा में प्रस्ताव — भाखड़ा डैम का नाम “सर छोटू राम बहुउद्देशीय परियोजना” रखा जाए।
- सर छोटू राम कृषि विश्वविद्यालय: जींद में — प्रो. वर्मा ने यही सुझाया था, यही माँग आज भी उचित है।
- किसान संगठन: छोटू राम की Zamindara League की तर्ज पर — हर पंचायत स्तर पर किसान समिति, हर तहसील में किसान सेवा केंद्र।
“सर छोटू राम नै कहा था — ‘अगर किसान चाहता सै कि वो इज्जत के साथ जिए — तो उठो और संगठित हो जाओ।’ यो संदेश आज भी उतना ही सच सै जितना 100 साल पहले था। जुलाना का किसान उठेगा — अर जुलाना बदलेगा।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल, जुलाना विधानसभा
दीन-बंधु सर छोटू राम अमर रहें। जय किसान। जय जुलाना। 🌾