स्वतंत्रता सेनानी | युद्ध बंदी | हरियाणा के प्रथम सिंचाई एवं बिजली मंत्री
चौधरी दलसिंह जी
1915 — 1991 | ग्राम रामराय, जींद
“खुंडा झोटा” · “पानी का बादल” — जींद की जनता के दिए दो प्रेम भरे नाम
⚔️ INA भर्ती अधिकारी — जर्मनी
🏛️ 8 विधायी कार्यकाल (1952–77)
💧 प्रथम सिंचाई एवं बिजली मंत्री — हरियाणा
कौन थे चौधरी दलसिंह जी?
चौधरी दलसिंह (15 जनवरी 1915 – 21 जनवरी 1991) जींद जिले के ग्राम रामराय के निवासी, चौधरी रामनाथ के सुपुत्र, हरियाणा राजनीति के स्तंभ, स्वतंत्रता सेनानी, द्वितीय विश्व युद्ध के वीर सैनिक एवं युद्ध बंदी, आज़ाद हिन्द फ़ौज (INA) के भर्ती अधिकारी और हरियाणा राज्य के प्रथम सिंचाई एवं बिजली मंत्री (1 नवम्बर 1966 – 23 मार्च 1967) थे।
जींद की जनता उन्हें दो प्रेम भरे नामों से पुकारती थी — “खुंडा झोटा” (जब वे किसी काम के पीछे पड़ जाते तो पूरा करके ही दम लेते) और “पानी का बादल” (मात्र छह माह के सिंचाई मंत्री काल में जींद के इतिहास में सबसे अधिक नहरी पानी खेतों में पहुँचाया)।
🎖️ सैनिक जीवन — A Soldier’s Life
मार्च 1936 में ब्रिटिश भारतीय सेना की 2nd Royal Lancers में भर्ती। 1939 में लाहौर में Indian Army Cavalry Football Tournament जीता। जनवरी 1941 में 3rd Motor Brigade की अग्रिम टुकड़ी के नेता के रूप में बॉम्बे बंदरगाह से विदेश रवाना — मिस्र, लीबिया की ओर।
7 अप्रैल 1941 — लीबिया के एल मेचिली (El Mechili) में जनरल रोमेल की जर्मन सेना के हमले में Intelligence NCO के रूप में कार्यरत रहते हुए युद्ध बंदी बनाए गए। साढ़े चार वर्ष (1941–45) यूरोप के विभिन्न POW कैम्पों में बंदी रहे — सिसली, इटली, जर्मनी, फ़्रांस, बेल्जियम और इंग्लैंड।
28 अप्रैल 1945 — अमेरिकी जनरल पैटन की सेना द्वारा मुक्त किये गए।
⚔️ आज़ाद हिन्द फ़ौज (INA) — नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से मुलाकात
अक्टूबर 1941 में जर्मनी के एना-बर्ग कैम्प में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का आगमन हुआ। चौधरी दलसिंह उन चुनिंदा 27 बंदियों में से एक थे जिन्हें विशेष साक्षात्कार के बाद चुना गया। नेताजी ने उन्हें भारतीय सैन्य दल (Indian Legion / INA) का भर्ती अधिकारी नियुक्त किया। उन्होंने बर्लिन में नेताजी से तीन बार मुलाकात की।
कैद के दौरान उन्होंने एना-बर्ग कैम्प में हिंदी स्कूल खोला और लगभग 1000 युद्ध बंदियों को हिंदी पढ़ाई। स्वयं रूसी भाषा सीखी और रूसी-भारतीय बंदियों के बीच दुभाषिये का कार्य किया।
💧 “पानी का बादल” — यह नाम कैसे पड़ा?
1 नवम्बर 1966 को हरियाणा राज्य के गठन के साथ ही चौधरी दलसिंह जी को प्रथम सिंचाई एवं बिजली मंत्री का दायित्व सौंपा गया। बुज़ुर्गों ने बताया कि कुल छह माह के मंत्री काल में जींद जिले में जितना नहरी पानी आया, उतना जींद के इतिहास में कभी नहीं आया था। रबी की फसल में खेतों में लगातार पानी रहता था। इसी कारण क्षेत्र के लोगों ने प्रेम से उन्हें “पानी का बादल” पुकारना शुरू किया।
कांग्रेस नेता के रूप में
1947 में जींद राज्य प्रजा मंडल के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक जीवन आरम्भ किया। जींद रियासत के विलय आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई और गिरफ्तार हुए।
AICC सदस्य (1953), जिला कांग्रेस कमेटी सांगरूर के अध्यक्ष (1954–59), PCC सदस्य (1960–69), और कांग्रेस विभाजन के बाद HPCC(O) के प्रथम अध्यक्ष (22 अगस्त 1971)।
उनके क्षेत्र में पं. जवाहर लाल नेहरू (1954), डॉ. पट्टाभि सीतारामैय्या, श्री यू.एन. ढेबर, श्री संजीव रेड्डी और श्री निलिंगप्पा जैसे राष्ट्रीय नेता आए।
प्रशासनिक अनुभव: प्रथम अध्यक्ष पंचायत समिति जींद (1961–65) एवं प्रथम अध्यक्ष मार्केट कमेटी जींद (1965–66)।
🏆 उपचुनाव के माहिर
चौधरी दलसिंह को पूरे प्रदेश में उपचुनाव लड़ने और जिताने का माहिर माना जाता था। स्वयं 2 उपचुनाव जीते और एक में दूसरे प्रत्याशी को विजयी बनवाया।
जुलाना 1967–70
1967 के दूसरे चुनाव (अक्टूबर/नवम्बर) में जुलाना से मास्टर नारायण सिंह से हारे। बाद में न्यायालय ने उस चुनाव को रद्द किया। 1970 के उपचुनाव में जुलाना से ही विजयी — जहाँ हारे वहीं से जीतकर दिखाया!
जींद 1972
INC(O) से जींद विधानसभा से चुनाव लड़ा — कांग्रेस प्रत्याशी दयाकृष्ण को 6,282 मतों से हराया। इंदिरा गांधी की लहर के बावजूद विजयी।
महम उपचुनाव
चौ. बंसीलाल के मुख्यमंत्री काल में महम विधानसभा का उपचुनाव। जनता पार्टी से जिम्मेदारी मिली — समस्त सरकारी तंत्र के बावजूद चौ. हरस्वरूप बूरा को विजयी बनवाया।
🍬 1972 — गुड़-चने खाकर चुनाव प्रचार!
1972 के विधानसभा चुनाव में प्रचार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से होता था — सिर्फ दलसिंह जी के पास गाड़ी थी। एक दिन चुनावी जुलूस होरन नहर के किनारे पहुँचा तो सब लोगों ने वहीं नहर पर बैठकर गुड़-चने खाए और नहर का पानी (ताला) पी लिया — न कोई होटल, न कोई खाना! यही था उनका सादगी भरा अंदाज़।
विधायी कार्यकाल — MLA Tenures (1952–1977)
PEPSU → पंजाब → हरियाणा — तीन राज्यों की विधानसभाओं में जींद और जुलाना का प्रतिनिधित्व
| # | विधानसभा | क्षेत्र | कार्यकाल | विशेष |
|---|---|---|---|---|
| 1 | PEPSU | जींद | 16.04.1952 — 04.03.1953 | प्रथम चुनाव — PEPSU विधानसभा |
| 2 | PEPSU | जींद | 26.03.1954 — 31.10.1956 | Estimate Committee + Public Accounts Committee |
| 3 | पंजाब | जींद | 06.11.1956 — 31.03.1957 | PEPSU → पंजाब विलय — निरंतर कार्यकाल |
| 4 | पंजाब | जींद | 26.01.1965 — 31.10.1966 | पंजाब विधानसभा — जींद क्षेत्र |
| 5 | हरियाणा 🏛️ | जींद | 01.11.1966 — 28.02.1967 | ⭐ प्रथम सिंचाई एवं बिजली मंत्री — हरियाणा |
| 6 | हरियाणा | जुलाना | 17.03.1967 — 21.11.1967 | प्रथम हरियाणा विधानसभा चुनाव — जुलाना से विजयी |
| — | हरियाणा | जुलाना | अक्टू./नवं. 1967 | दूसरा चुनाव — मास्टर नारायण सिंह से पराजित। बाद में न्यायालय ने यह चुनाव रद्द किया। |
| 7 | हरियाणा | जुलाना | 26.06.1970 — 20.01.1972 | ✅ उपचुनाव — जहाँ हारे वहीं से जीतकर दिखाया! |
| 8 | हरियाणा | जींद | 04.04.1972 — 30.04.1977 | INC(O) — HPCC(O) अध्यक्ष — 6,282 मतों से विजय |
2nd Royal Lancers — Intelligence NCO, रोमेल की सेना से लड़ाई
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा नियुक्त भर्ती अधिकारी — जर्मनी
6 माह में जींद के इतिहास का सबसे अधिक नहरी पानी पहुँचाया
6 बार गिरफ्तारी — MISA, शिक्षक आंदोलन, नागरिक स्वतंत्रता
जीवन परिचय — Biodata
व्यक्तिगत
जन्म: 15 जनवरी 1915, ग्राम रामराय, जींद
निधन: 21 जनवरी 1991
पिता: चौधरी रामनाथ
भाषाएँ: हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, पंजाबी एवं रूसी
उपनाम: “खुंडा झोटा” · “पानी का बादल”
सैनिक जीवन
भर्ती: 2nd Royal Lancers, मार्च 1936
पद: Intelligence NCO
युद्ध बंदी: 8 अप्रैल 1941 — 28 अप्रैल 1945
मुक्ति: जनरल पैटन (USA) द्वारा
INA: भर्ती अधिकारी — नेताजी बोस द्वारा नियुक्त
देश: मिस्र, सऊदी अरब, लीबिया, सिसली, इटली, जर्मनी, फ़्रांस, बेल्जियम, इंग्लैंड
राजनीतिक गिरफ्तारियां — 6 बार कैद
| # | कब | कारण |
|---|---|---|
| 1 | 1948 | जींद राज्य विलय आंदोलन — “Dictator” के रूप में गिरफ्तार |
| 2 | 1970 | चंडीगढ़ आंदोलन — हरियाणा सरकार द्वारा |
| 3 | 13.02.1973 | शिक्षक आंदोलन |
| 4 | 30.05.1973 | हांसी में नागरिक स्वतंत्रता सम्मेलन |
| 5 | 05.05.1973 | जींद में बिजली कटौती के विरुद्ध जुलूस |
| 6 | 26.06.1975 | MISA — आपातकाल (Emergency) — रोहतक एवं महेंद्रगढ़ जेल (मई 1976 में रिहाई) |
📖 पुस्तक: “युद्ध एवं शान्ति का बंधक” (A Prisoner of War and Peace)
चौधरी दलसिंह जी ने 1975 में आपातकाल के दौरान रोहतक जेल में MISA के अंतर्गत कैद रहते हुए यह पुस्तक लिखी। इसमें उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में अपने साढ़े चार वर्ष के युद्ध बंदी जीवन का वर्णन किया है। इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद उनके पौत्र अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल ने किया है।
उनके पौत्र की कलम से
“मुझे बहुत गर्व महसूस होता है कि मैं उस महान शख्सियत का पौत्र हूँ। इनके सार्वजनिक जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है क्योंकि इन्होंने कभी भी अपने जीवन एवं शख्सियत का महिमामंडन नहीं किया। पर इतिहास की एक खासियत होती है वह यह कि इसे कभी झुठलाया नहीं जा सकता।”
— अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल, “युद्ध एवं शान्ति का बंधक” (अनुवाद)
विरासत
तीन पीढ़ियों की सेवा — एक परिवार, एक संस्था
चौ. दलसिंह जी
8 विधायी कार्यकाल
प्रथम सिंचाई मंत्री — हरियाणा
INA भर्ती अधिकारी
स्वतंत्रता सेनानी
चौ. परमिन्दर सिंह ढुल
2 बार विधायक (2009, 2014)
₹120 करोड़ विकास
5500 किसानों की ज़मीन बचाई
अधि. रविन्द्र सिंह ढुल
3000+ RTI | 50+ PIL
पूर्व AAG हरियाणा
कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट
“दादा जी ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी, खेतों में पानी पहुँचाया, जेल गए पर सिद्धांत नहीं छोड़े!”
📖 Wikipedia
en.wikipedia.org/wiki/Dal_Singh — विस्तृत अंग्रेज़ी जीवनी